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Saturday, August 1, 2026
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सी.एस.जे.एम.यू में दो दिवसीय मीडिया कार्यशाला का हुआ समापन, पत्रकारिता छात्रों ने सीखी टीवी एंकरिंग, इंटरव्यू, डिबेट और न्यूज पैकेजिंग

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प्रो. डॉ. मनुकोण्डा रवीन्द्रनाथ बोले— ग्राउंड रिपोर्टिंग और स्टूडियो एंकरिंग की दक्षता ही बनाती है सफल टीवी पत्रकार

विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा— व्यावहारिक प्रशिक्षण ही विद्यार्थियों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है


कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित दो दिवसीय टीवी प्रोडक्शन कार्यशाला का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन विद्यार्थियों को टीवी पत्रकारिता के व्यावहारिक पक्षों का गहन प्रशिक्षण दिया गया। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस श्वेता अरोरा मलहोत्रा ने प्रतिभागियों को टीवी न्यूज इंटरव्यू, न्यूज डिबेट, स्टूडियो एंकरिंग, न्यूज पैकेज निर्माण तथा कैमरे के सामने प्रभावी प्रस्तुति की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया। विद्यार्थियों ने स्वयं एंकर, रिपोर्टर, पैनलिस्ट और प्रोड्यूसर की भूमिका निभाकर वास्तविक न्यूजरूम जैसी परिस्थितियों का अनुभव प्राप्त किया।

कार्यशाला के दौरान छात्रों ने समाचार चयन से लेकर स्क्रिप्ट लेखन, विजुअल चयन, वॉयस ओवर, बाइट्स के उपयोग, पीस-टू-कैमरा (PTC), स्टूडियो प्रस्तुति तथा अंतिम न्यूज पैकेज तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया। इसके साथ ही विभिन्न समसामयिक विषयों पर न्यूज डिबेट आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने एंकर, विशेषज्ञ और प्रवक्ता की भूमिका निभाते हुए तार्किक एवं संतुलित प्रस्तुति का प्रदर्शन किया। इस व्यावहारिक अभ्यास ने विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, टीम वर्क और त्वरित निर्णय क्षमता का विकास किया।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के मीडिया विभाग के प्रो. डॉ. मनुकोण्डा रवीन्द्रनाथ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का मीडिया उद्योग केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक दक्षता और बहुआयामी कौशल की अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा कि ग्राउंड रिपोर्टिंग की संवेदनशीलता और स्टूडियो एंकरिंग की प्रभावशाली प्रस्तुति, दोनों में समान दक्षता ही एक सफल टीवी पत्रकार की पहचान है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि समाचारों के प्रति जिज्ञासा, तथ्यों की गहन पड़ताल, निष्पक्ष दृष्टिकोण और तकनीक के साथ निरंतर सीखने की प्रवृत्ति उन्हें मीडिया जगत में अलग पहचान दिलाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कैमरे के सामने आत्मविश्वास, स्पष्ट अभिव्यक्ति और तथ्यपरक प्रस्तुति ही दर्शकों का विश्वास अर्जित करती है, इसलिए विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास और फील्ड अनुभव पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसी दृष्टि से विभाग नियमित रूप से ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है, ताकि विद्यार्थी कक्षा में अर्जित ज्ञान को व्यवहारिक रूप में लागू करना सीख सकें। उन्होंने कहा कि मीडिया उद्योग तेजी से बदल रहा है और आज संस्थानों की जिम्मेदारी केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे दक्ष मीडिया पेशेवर तैयार करना है जो न्यूजरूम की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण विद्यार्थियों के रोजगार के अवसरों को भी सुदृढ़ करेंगे।

कार्यशाला के अंत में विद्यार्थियों ने तैयार किए गए न्यूज पैकेज, इंटरव्यू और एंकरिंग प्रस्तुतियों का प्रदर्शन किया, जिसकी विशेषज्ञों ने समीक्षा करते हुए आवश्यक सुझाव दिए। प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें टीवी पत्रकारिता की वास्तविक कार्यप्रणाली को निकट से समझने और व्यवहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यशाला का संयोजन डॉ. ओमशंकर गुप्ता, डॉ हरिओम कुमार व सागर कनौजिया ने किया। इस अवसर पर विभाग के सह-आचार्य डॉ. योगेन्द्र पाण्डेय, सहायक आचार्य जितेन्द्र डबराल, डॉ. रश्मि गौतम, डॉ. होइमावती तालुकदार, प्रेम किशोर शुक्ला सहित विभाग के छात्र एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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