टाटा सॉल्ट को 1983 में पैकेटबंद आयोडीनयुक्त नमक के रूप में बाजार में उतारा गया। उस समय खुले नमक का चलन आम था। पैकेटबंद नमक के लिए अधिक कीमत देना ग्राहकों को सहज नहीं लगता था, इसलिए कंपनी को इसकी गुणवत्ता के साथ आयोडीन के महत्व के बारे में भी बताना पड़ा।
इस नमक की कहानी गुजरात के मिथापुर से शुरू हुई, जहां टाटा केमिकल्स के सोडा ऐश प्लांट में इस्तेमाल के लिए समुद्र के खारे पानी को मीठा किया जाता था। इस प्रक्रिया में बचा नमक आगे चलकर एक अलग उपभोक्ता ब्रांड की नींव बना। टाटा समूह ने 1927 में गुजरात के ओखा से नमक उत्पादन शुरू किया था।
मिथापुर में नमक बनने की कहानी
1944 में मिथापुर स्थित सोडा ऐश प्लांट को मीठे पानी की जरूरत थी। तटीय इलाके में पानी की कमी के चलते टाटा ने अरब सागर के खारे पानी को साफ कर उपयोग लायक बनाने की प्रक्रिया अपनाई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस प्रक्रिया के बाद बचा नमक उच्च गुणवत्ता का था और उसमें जिप्सम या चॉक जैसी मिलावट नहीं थी। इसी नमक ने टाटा सॉल्ट की नींव रखी।
शुरुआत में पैकेटबंद नमक ग्राहकों के लिए नया था और खुले नमक से महंगा भी पड़ता था। बिक्री धीमी रहने पर कंपनी ने आयोडीन की कमी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
आयोडीन की कमी को घेंघा रोग, बच्चों के मानसिक विकास में बाधा और गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं से जोड़ा जाता है। टाटा ने अपने प्रचार में आयोडीन के महत्व, उत्पाद की गुणवत्ता और सीलबंद पैकिंग को सामने रखा। कंपनी ने प्रचार के जरिए खुले नमक और अपने उत्पाद के बीच स्वच्छता का अंतर भी दिखाया। बाद में ‘देश का नमक’ अभियान इसी पहचान का हिस्सा बना।
नमक से आगे बढ़ा खाद्य कारोबार
समय के साथ टाटा सॉल्ट के पोर्टफोलियो में लाइट और रॉक सॉल्ट जैसे विकल्प जुड़े। टाटा समूह ने रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों में भी विस्तार किया। इस कारोबार के प्रमुख ब्रांडों में टाटा संपन्न शामिल है, जिसके तहत दाल, मसाले, ड्राई फ्रूट्स, कोल्ड-प्रेस्ड तेल और अन्य खाद्य उत्पाद बेचे जाते हैं।
कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा संपन्न का राजस्व 1,500 करोड़ रुपये से अधिक रहा और सालाना वृद्धि 46% दर्ज की गई। पिछले पांच वर्षों में इसके राजस्व की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर 34% रही।
टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का समेकित राजस्व वित्त वर्ष 2025-26 में 20,290 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले यह 17,618 करोड़ रुपये था। कंपनी ने इसी वित्त वर्ष में 2,815 करोड़ रुपये का EBITDA और 1,547 करोड़ रुपये का समूह शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। 31 मार्च 2026 को इसका बाजार पूंजीकरण करीब 1,00,421 करोड़ रुपये था।
कंपनी के मुताबिक, उसके उत्पाद करीब 29 करोड़ भारतीय घरों तक पहुंचते हैं और उसका वितरण नेटवर्क लगभग 45 लाख खुदरा दुकानों में फैला है। नमक से शुरू हुआ कारोबार अब कई खाद्य श्रेणियों में मौजूद है, हालांकि टाटा सॉल्ट उसकी सबसे पहचानी जाने वाली उपभोक्ता पेशकशों में बना हुआ है।

















