चिकित्सा और तकनीक के मेल से एक बार फिर असंभव लगने वाला काम संभव हो गया है। भारतीय यूरोलॉजिस्ट डॉ. सैयद मोहम्मद गौस ने चीन के वुहान शहर में रहते हुए हैदराबाद में एक मरीज की रोबोटिक सर्जरी कर मेडिकल जगत में नई मिसाल पेश की है।
जानकारी के अनुसार 57 वर्षीय महिला को यूरेट्रल रीइम्प्लांटेशन सर्जरी की जरूरत थी। इस प्रक्रिया में किडनी और मूत्राशय के बीच जुड़ी नलियों को दोबारा जोड़ा जाता है। मरीज का ऑपरेशन हैदराबाद स्थित एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेफ्रोलॉजी एंड यूरोलॉजी में किया गया, जबकि डॉ. गौस उस समय चीन के वुहान में मौजूद थे।
सर्जरी शुरू होने से पहले भारत और चीन की मेडिकल टीमों ने मरीज की रिपोर्ट और मेडिकल स्थिति की विस्तार से समीक्षा की। इसके बाद पूरी प्रक्रिया की योजना तैयार की गई और रोबोटिक सिस्टम को ऑपरेशन के लिए तैयार किया गया।
5G नेटवर्क ने बनाया संभव
इस ऑपरेशन में चीन में विकसित अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। हैदराबाद के ऑपरेशन थिएटर में हाई-डेफिनिशन 3D कैमरों से लैस रोबोटिक सिस्टम पहले से स्थापित था।
डॉ. गौस वुहान के टोंगजी अस्पताल में कंट्रोल कंसोल पर बैठे थे और वहीं से रोबोटिक उपकरणों को नियंत्रित कर रहे थे। दोनों शहरों की मेडिकल टीमें 5G नेटवर्क के जरिए आपस में जुड़ी हुई थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार वुहान से भेजे गए कमांड महज 0.2 सेकंड में हैदराबाद पहुंच रहे थे। इसी वजह से इतनी लंबी दूरी के बावजूद सर्जरी के दौरान किसी तरह की तकनीकी बाधा नहीं आई।
भविष्य की चिकित्सा में बड़ी भूमिका
करीब 90 मिनट तक चली यह सर्जरी सफल रही। सुरक्षा के लिहाज से हैदराबाद में एक इमरजेंसी मेडिकल टीम भी मौजूद थी, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत हस्तक्षेप किया जा सके।
भारत में चीन की दूतावास प्रवक्ता यू जिंग ने भी इस उपलब्धि की सराहना की है। उन्होंने इसे चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
विशेषज्ञों का मानना है कि रोबोटिक और रिमोट सर्जरी भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल सकती है। इससे दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं मिल सकेंगी और इलाज के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी।


















