देशभर में मॉनसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए मौसम विभाग ने चिंता बढ़ाने वाला पूर्वानुमान जारी किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। विभाग ने अनुमान जताया है कि जून से सितंबर के बीच कुल वर्षा सामान्य स्तर से लगभग 10 प्रतिशत कम रह सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक इस बार देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा का प्रदर्शन सामान्य से कमजोर रह सकता है। केवल पूर्वोत्तर भारत में सामान्य स्तर की बारिश होने की संभावना जताई गई है। बाकी क्षेत्रों में वर्षा का आंकड़ा औसत से नीचे रहने का अनुमान है।
मध्य और प्रायद्वीपीय भारत में अधिक असर
आईएमडी के अनुसार मध्य भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में बारिश की कमी अधिक महसूस की जा सकती है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है।
विभाग ने यह भी बताया कि मॉनसून कोर जोन, जहां आमतौर पर अच्छी बारिश होती है, वहां भी इस बार वर्षा का स्तर प्रभावित हो सकता है। जून महीने में ही सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत कम बारिश का अनुमान लगाया गया है। हालांकि पूर्वोत्तर और कुछ दक्षिणी क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा दर्ज हो सकती है।
हीटवेव और अल-नीनो बढ़ाएंगे चुनौती
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 2026 के दौरान अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में हीटवेव की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
विभाग ने अल-नीनो की संभावित सक्रियता का भी जिक्र किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल-नीनो की स्थिति विकसित होने पर मॉनसून की तीव्रता प्रभावित हो सकती है। इसके कारण वर्षा में कमी और तापमान में वृद्धि देखने को मिल सकती है।
कहां पहुंचा मॉनसून?
मौसम विभाग के अनुसार मॉनसून फिलहाल श्रीलंका और अंडमान-निकोबार क्षेत्र तक पहुंच चुका है। अगले दो से तीन दिनों में इसके लक्षद्वीप और बंगाल की खाड़ी के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ने की संभावना है।
आमतौर पर केरल में मॉनसून 1 जून के आसपास पहुंचता है। विभाग का अनुमान है कि जून के अंत तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून देश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर सकता है।

















