पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को लेकर नए सियासी समीकरण बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं और आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 12 टीएमसी सांसद भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ अन्य सांसदों के नामों पर भी चर्चा चल रही है। हालांकि अब तक किसी भी सांसद ने सार्वजनिक रूप से इन खबरों की पुष्टि नहीं की है।
दल बदल कानून को लेकर भी चर्चा
रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सांसदों की संख्या को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। माना जा रहा है कि दल बदल कानून से बचने के लिए आवश्यक संख्या जुटाने पर रणनीति बनाई जा रही है। राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक यह संख्या 20 तक पहुंच सकती है।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 29 सांसद हैं। ऐसे में यदि दो-तिहाई सांसद अलग समूह बनाते हैं तो दल बदल कानून लागू नहीं होगा। इसी वजह से इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।
विधायकों की दूरी से बढ़ीं अटकलें
हाल ही में पार्टी के एक प्रदर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं हुए थे। चुनावी हार के बाद आयोजित इस कार्यक्रम में 80 में से केवल 35 विधायक ही पहुंचे थे। इसके बाद संगठन के भीतर मतभेद और असंतोष की चर्चाएं तेज हो गईं।
हालांकि तृणमूल नेताओं ने इन अटकलों को खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कई विधायक संगठनात्मक और व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
इसी बीच फलता में भाजपा की जीत के बाद डायमंड हार्बर नगर पालिका में टीएमसी के आठ पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया। इन इस्तीफों के बाद विपक्ष ने तृणमूल कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले मॉनसून सत्र तक स्थिति और साफ हो सकती है। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के अंदर संभावित टूट और भाजपा की बढ़ती सक्रियता चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।


















