Gold Rate Today 16 March: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार 16 मार्च को शुरुआती कारोबार में गिरावट दर्ज की गई। बाजार में कमजोरी का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों का कम होना माना जा रहा है।
इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर कीमती धातुओं के दाम पर भी दिखाई दे रहा है।
MCX पर सोने का भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव में गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब 1,800 रुपये यानी 1.14 प्रतिशत गिरकर 1,56,655 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी के वायदा कारोबार में भी भारी गिरावट देखने को मिली। चांदी की कीमत लगभग 4,300 रुपये यानी करीब 1.7 प्रतिशत गिरकर 2,55,101 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखी गई। सिंगापुर के शुरुआती कारोबार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.7 प्रतिशत गिरकर 4,986.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
इसी तरह चांदी में भी करीब 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 80.03 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। इसके अलावा प्लैटिनम और पैलेडियम के दाम में भी कमी देखी गई।
5000 डॉलर के स्तर से नीचे आया सोना
रिपोर्ट्स के मुताबिक सोने की कीमतों में गिरावट के कारण यह 5,000 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया है। कारोबार की शुरुआत में ही इसमें करीब 1 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई। यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती ऊर्जा कीमतों और महंगाई की आशंकाओं के कारण यह संभावना कम हो गई है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरों में कटौती करेगा।
आमतौर पर ब्याज दरें ऊंची रहने पर सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ जाता है, क्योंकि निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए अन्य विकल्पों की ओर रुख करते हैं।
आगे क्या रह सकती है स्थिति
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में कटौती की संभावना बहुत कम है।
हालांकि लंबी अवधि में यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी और महंगाई दोनों का खतरा बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में फिर से सोने की ओर रुख कर सकते हैं।
फिलहाल वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों की नीतियां सोने-चांदी के बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

















