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Friday, March 13, 2026
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रसोई गैस संकट: पश्चिम एशिया तनाव के बीच एलपीजी आयात प्रभावित, सरकार ने उत्पादन बढ़ाया, होटल-रेस्टोरेंट पर बड़ा फैसला

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हालिया वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार के सामने नई चुनौतियाँ है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता है और अपनी कुल जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है।

इन आयातों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग में बाधा आने के कारण एलपीजी सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। इससे निपटने के लिए सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई कदम उठाए हैं।

वर्तमान संकट की स्थिति

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और यह अधिकतर होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।

यदि यह मार्ग बाधित रहता है तो भारत की कुल एलपीजी खपत का करीब 55 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए सरकार ने पहले से ही आपूर्ति प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था पर काम शुरू कर दिया है।

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के 33 करोड़ से अधिक घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इस उद्देश्य से आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया गया है ताकि गैस सप्लाई में घरेलू उपभोक्ताओं को कॉमर्शियल और औद्योगिक उपयोग के मुकाबले प्राथमिकता मिल सके।

बुकिंग नियमों में बदलाव

पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए सरकार ने गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर 45 दिन कर दिया गया है।

वहीं शहरी उपभोक्ताओं के लिए यह अवधि 25 दिन निर्धारित की गई है, जो पहले 21 दिन थी। इसका उद्देश्य सीमित सप्लाई के दौरान संतुलन बनाए रखना है।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने का निर्देश

सरकार ने सभी रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उत्पादन में संकट से पहले के स्तर की तुलना में लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह अतिरिक्त उत्पादन सीधे घरेलू मांग को पूरा करने के लिए उपयोग किया जा रहा है।

होटल और उद्योगों के लिए वैकल्पिक ईंधन

कॉमर्शियल एलपीजी की खपत कम करने के लिए सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर के लिए वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को अनुमति दी है।

पर्यावरण मंत्रालय ने राज्यों को सलाह दी है कि संकट की स्थिति में बायोमास, आरडीएफ पेलेट्स, केरोसिन और कोयले के उपयोग की अनुमति दी जा सकती है।

इसके साथ ही कॉमर्शियल एलपीजी का आवंटन औसत मासिक जरूरत के लगभग 20 प्रतिशत तक सीमित किया गया है। सरकार ने अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता सूची में रखा है ताकि इन संस्थानों में गैस सप्लाई प्रभावित न हो।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों को अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसिन जारी किया है और छोटे-मध्यम उपभोक्ताओं के लिए कोयले का अतिरिक्त आवंटन करने के निर्देश भी दिए हैं।

कालाबाजारी रोकने के लिए निगरानी

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि सीमित आपूर्ति की स्थिति में जमाखोरी और कालाबाजारी की संभावना बढ़ सकती है।

इससे निपटने के लिए इंडियन ऑयल (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) के अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। इसके अलावा जिला स्तर पर भी निगरानी समितियां गठित की जा रही हैं। सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि जमाखोरी और कालाबाजारी के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाए।

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