लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव संसद में ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। इस प्रस्ताव पर दो दिनों तक चर्चा चली, जिसके बाद सदन ने इसे स्वीकार नहीं किया।
प्रस्ताव खारिज होने के बाद ओम बिरला ने पहली बार लोकसभा को संबोधित किया और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को बराबर अवसर देने की कोशिश की है।
निष्पक्षता के साथ चलाया सदन
अपने संबोधन की शुरुआत में ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही को हमेशा नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुसार संचालित करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक सदस्य को अपने विचार रखने का अवसर देने की कोशिश की गई और सदन की कार्यवाही को अनुशासन, संतुलन और निष्पक्षता के साथ चलाया गया।
अविश्वास प्रस्ताव के दौरान खुद को रखा अलग
स्पीकर ने बताया कि जब उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया, तब उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए सदन की कार्यवाही के संचालन से खुद को अलग कर लिया था।
उन्होंने कहा कि यह कदम संसदीय परंपराओं और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए उठाया गया था।
विपक्ष के आरोपों पर दिया जवाब
ओम बिरला ने कहा कि उन पर विपक्ष की आवाज दबाने के आरोप लगाए गए, लेकिन उन्होंने हमेशा हर सदस्य की बात को गंभीरता से सुना।
उन्होंने कहा कि लोकसभा 140 करोड़ भारतीयों का सदन है और इसे नियमों के अनुसार ही चलाया जाना चाहिए। उन्होंने समर्थन और आलोचना करने वाले सभी सांसदों का आभार भी जताया।
नियमों के तहत बोलने का अधिकार
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सदन में किसी भी सदस्य को नियमों से ऊपर विशेषाधिकार नहीं दिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि चाहे प्रधानमंत्री हों, मंत्री हों, नेता प्रतिपक्ष हों या अन्य सांसद—सभी को सदन में नियमों के तहत ही बोलने का अधिकार है। ये नियम स्वयं सदन द्वारा बनाए गए हैं और उन्हीं के अनुसार कार्यवाही संचालित की जाती है।
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सदन को निष्पक्षता और नियमों के अनुसार चलाना रहा है और आगे भी वे संसदीय परंपराओं का पालन करते हुए कार्य करेंगे।

















