31.1 C
Indore
Monday, March 2, 2026
Homeअंतर्राष्ट्रीयबांग्लादेश के हिंदुओं में डर का माहौल, लिंचिंग की घटनाओं के बाद...

बांग्लादेश के हिंदुओं में डर का माहौल, लिंचिंग की घटनाओं के बाद भारत से मदद की गुहार

Date:

दिपू चंद्र दास और अमृत मंडल की नृशंस मॉब लिंचिंग की घटनाओं ने बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू समुदाय को गहरे डर में डाल दिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों से यह आवाज उठने लगी है कि अल्पसंख्यक अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे रोजाना डर के साये में जी रहे हैं और हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार रंगपुर ढाका चित्तागांग और मयमनसिंह जैसे इलाकों में हिंदू समुदाय में भय ज्यादा दिख रहा है। कई लोगों का कहना है कि धर्म को लेकर रोज ताने सुनने पड़ते हैं और विरोध करने की हिम्मत नहीं होती। उन्हें आशंका है कि मामूली विवाद भी कभी भी हिंसा में बदल सकता है और अगला निशाना कोई भी हो सकता है।

हिंदू समुदाय की चिंता उस समय और बढ़ गई जब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी से जुड़ी राजनीतिक हलचल तेज हुई। समुदाय के लोगों का कहना है कि इस पार्टी को लेकर उनका अनुभव अच्छा नहीं रहा है। उन्हें डर है कि अगर सत्ता परिवर्तन हुआ तो अल्पसंख्यकों के लिए हालात और मुश्किल हो सकते हैं। कई लोगों का कहना है कि वे भारत जाना चाहते हैं लेकिन सीमाएं बंद हैं।

बांग्लादेश के हिंदुओं में डर का माहौल

यह चिंता अब भारत तक भी पहुंच गई है। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में बसे बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों का कहना है कि हालात बेहद गंभीर हैं। उनका मानना है कि संकट की इस घड़ी में बांग्लादेश के हिंदुओं को सिर्फ भारत से ही उम्मीद है। संगठनों का कहना है कि अब सिर्फ बयान नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

स्थानीय हिंदू निवासियों का कहना है कि सीमा खोलने का मतलब स्थायी पलायन नहीं है बल्कि जान बचाने का एक विकल्प होना चाहिए। कई लोगों ने कहा कि रोजी-रोटी छोड़कर भागना आसान नहीं है लेकिन जब जान का डर हो तो कोई रास्ता खुला होना जरूरी है। फिलहाल बांग्लादेश के हिंदू खुद को असहाय और अकेला महसूस कर रहे हैं।

Related Posts

spot_img

मध्य प्रदेश