दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) लगभग एक दशक से निष्क्रिय है और अब क्षेत्र में नए भू-राजनीतिक समीकरण उभर रहे हैं। बांग्लादेश और पाकिस्तान मिलकर एक नए क्षेत्रीय संगठन के गठन पर विचार कर रहे हैं जिसमें भारत के बजाय चीन को शामिल करने की योजना है। यह कदम भारत को कूटनीतिक रूप से घेरने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
बांग्लादेश में पिछले साल हुए तख्तापलट के बाद से ही देश की विदेश नीति में बदलाव आया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं जबकि वर्तमान नेतृत्व भारत से दूरी बनाकर पाकिस्तान और चीन के करीब जाता दिख रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक अहमद डार ने पहले ही कहा है कि बांग्लादेश और चीन के साथ त्रिपक्षीय सहयोग शुरू किया जा रहा है।
बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान के साथ जाना संभव
बांग्लादेश की सरकारी समाचार एजेंसी संगबाद संस्था ने विदेश सलाहकार मोहम्मद तोहिद हुसैन के हवाले से लिखा है कि बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान के साथ जाना संभव है हालांकि नेपाल और भूटान जैसे देशों के लिए भारत को छोड़ना आसान नहीं होगा। यह टिप्पणी पाकिस्तानी विदेश मंत्री की बयान के बाद आई है।
अगस्त में पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने 13 साल बाद बांग्लादेश का दौरा किया था। इसके अलावा पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की दो बार मुलाकात भी हो चुकी है। इन विकासों से साफ है कि शेख हसीना के बाद बांग्लादेश के तेवर बदल गए हैं।
इस नए संगठन के गठन का उद्देश्य भारत को क्षेत्रीय सहयोग से बाहर रखते हुए चीन के साथ मिलकर अपनी ताकत बढ़ाना है। यह कदम दक्षिण एशिया में भारत की केंद्रीय भूमिका को चुनौती दे सकता है और क्षेत्रीय सहयोग के नए समीकरण बना सकता है।



















