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इंदौर ने फिर रचा इतिहास: बायोगैस मॉडल को दिल्ली में सराहा, आयुक्त वर्मा ने साझा किया अनुभव

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नई दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में इंदौर का बायोगैस मॉडल हुआ प्रस्तुत

नई दिल्ली। देशभर में सात बार स्वच्छता में नंबर वन आने वाला इंदौर शहर लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वहीं, इंदौर नगर निगम भी सफाई में अव्वल आने के साथ-साथ लगातार नए प्रयोग और नवाचार कर देश में अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है। हाल ही में इंदौर नगर निगम ने कचरे से गैस बनाने का प्लांट स्थापित किया जो देश में पहला प्लांट है। देश के विभिन्न शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी विकास, जल संरक्षण और हरित बुनियादी ढांचे को लेकर विश्व बैंक समूह, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, आर्थिक मामलों के मंत्रालय, और एशियाई विकास बैंक द्वारा दिल्ली में एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में इंदौर नगर निगम के आयुक्त शिवम वर्मा और अतिरिक्त आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने भाग लिया।कार्यशाला में निगम आयुक्त शिवम वर्मा ने इंदौर के बायोगैस मॉडल की सफलता की कहानी साझा की, जिसे प्रतिभागियों ने अत्यधिक सराहा। उन्होंने बताया कि कैसे इंदौर ने जैविक कचरे से बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल का उपयोग किया। उन्होंने बताया कि जैविक कचरे का कुशल प्रबंधन: इंदौर में घर-घर से जैविक कचरा एकत्रित कर उसे अलग-अलग करके प्लांट में भेजा जाता है, जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके।

इंदौर में ऊर्जा और आय का स्रोत बना कचरा

आयुक्त वर्मा ने बताया कि बायोगैस प्लांट से उत्पादित गैस का उपयोग परिवहन और ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है। साथ ही, इससे उत्पन्न जैविक खाद का व्यावसायिक उपयोग होता है, जिससे नगर निगम को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होता है।

अन्य शहरों को भी योजना अपनाने को किया प्रेरित

इंदौर के इस मॉडल की सफलता में नागरिकों की जागरूकता और सामुदायिक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्मा ने अन्य शहरों को भी इस तरह की परियोजनाएं अपनाने के लिए प्रेरित किया।

अन्य शहरों ने भी साझा किए अनुभव

:-इस कार्यशाला में पिंपरी-चिंचवड़, विशाखापत्तनम, बेंगलुरु और जयपुर सहित कई शहरों के आयुक्तों ने भी अपने-अपने शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और शहरी विकास के लिए अपनाई गई रणनीतियों और सफलताओं पर चर्चा की। पिंपरी-चिंचवड़ के आयुक्त संजय कुलकर्णी ने अपने शहर में PPP मॉडल के जरिए किए गए अपशिष्ट प्रबंधन परियोजनाओं का विवरण दिया। वहीं, विशाखापत्तनम के आयुक्त श्री पी. संपत ने शहरी ढांचे को विकसित करने के लिए निजी निवेशकों के साथ साझेदारी पर प्रकाश डाला। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अलावा, कार्यशाला में जल संरक्षण, वायु प्रदूषण नियंत्रण, शहरी परिवहन, और हरित बुनियादी ढांचे के विकास पर भी चर्चा की गई। पैनल में शामिल विशेषज्ञों ने इन विषयों पर अपने अनुभव और चुनौतियों को साझा करते हुए शहरों को सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया।

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