17.1 C
Indore
Monday, March 2, 2026
Homeबड़ी खबरजस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से झटका: याचिका खारिज, महाभियोग जांच...

जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से झटका: याचिका खारिज, महाभियोग जांच पर रोक से इनकार

Date:

सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका खारिज कर दी है, जिससे अधजली नकदी मामले में गठित संसदीय जांच समिति को जांच जारी रखने की अनुमति मिल गई है। अदालत ने समिति के गठन को चुनौती देने वाली दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा को बड़ा झटका देते हुए अधजली नकदी मामले में उनके खिलाफ गठित संसदीय जांच समिति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के साथ ही जजेज इन्क्वायरी एक्ट 1968 के तहत बनी संसदीय समिति को आगे जांच करने की अनुमति मिल गई है।

यह याचिका लोकसभा स्पीकर द्वारा भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए गठित समिति की वैधता को चुनौती देती थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर समिति की जांच में कोई बाधा नहीं डाली जा सकती।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का रुख

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की पीठ ने 8 जनवरी, 2026 को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। अब कोर्ट के ताजा फैसले के बाद संसदीय समिति के गठन और उसकी प्रक्रिया पर मुहर लग गई है।

जस्टिस वर्मा की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि लोकसभा स्पीकर ने जजेज इन्क्वायरी एक्ट 1968 की धारा 3(2) के तहत एकतरफा तरीके से समिति का गठन किया, जबकि उसी दिन राज्यसभा में भी उन्हें हटाने के प्रस्ताव का नोटिस दिया गया था।

याचिका में यह भी कहा गया था कि जब राज्यसभा के उपसभापति ने उन्हें हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया था, तो लोकसभा स्पीकर द्वारा समिति का गठन समान व्यवहार और संवैधानिक सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।

कब बनी जांच समिति

अगस्त 2025 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में महाभियोग प्रस्ताव आने के बाद तीन सदस्यीय जांच समिति के गठन की घोषणा की थी।
इस पैनल में शामिल हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार
  • मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंदर मोहन
  • सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य

पूरा मामला क्या है?

मार्च 2025 में दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर भीषण आग लगने की घटना के बाद भारी मात्रा में नकदी कैश के बंडल बरामद हुए थे। इनमें कुछ अधजले थे और कथित तौर पर उनकी ऊंचाई 1.5 फीट से अधिक बताई गई।

इस घटना का संज्ञान लेते हुए तत्कालीन चीफ जस्टिस ने जस्टिस वर्मा का तबादला दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया था। इसके बाद उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया और जांच समिति गठित की गई।

Related Posts

spot_img

मध्य प्रदेश