Russia Taliban Ties: रूस ने 3 जुलाई 2025 को तालिबान के नेतृत्व वाली अफगान सरकार को औपचारिक मान्यता दी। ऐसा करने वाला वह पहला देश बना। इस फैसले से अफगानिस्तान के साथ मॉस्को के संबंधों को औपचारिक कूटनीतिक दर्जा मिला। अगस्त 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर लौटने के बाद कई देशों ने उसके प्रशासन के साथ संपर्क बनाए रखा, लेकिन औपचारिक मान्यता देने से परहेज किया।
रूस-तालिबान संबंधों का कूटनीतिक संदर्भ
मान्यता से पहले भी रूस और तालिबान के बीच संपर्क था। मॉस्को ने अफगानिस्तान से जुड़े क्षेत्रीय संवाद में हिस्सा लिया और तालिबान प्रतिनिधियों से बातचीत की। हालांकि, बातचीत और औपचारिक मान्यता अलग-अलग घटनाक्रम हैं। अफगानिस्तान की स्थिरता का असर उसके पड़ोसी देशों और व्यापक क्षेत्र पर पड़ता है। रूस के फैसले को अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जुड़ी उसकी सुरक्षा तथा कूटनीतिक प्राथमिकताओं के संदर्भ में देखा जा सकता है।
पाकिस्तान पर असर को लेकर क्या स्पष्ट है?
रूस के कदम को पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी बताया जा रहा है। मॉस्को तालिबान सरकार के साथ संबंधों को औपचारिक रूप दे रहा है। हालांकि इससे पाकिस्तान के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई या नीति की भूमिका स्पष्ट नहीं होती है। अफगानिस्तान से जुड़े क्षेत्रीय समीकरणों में पाकिस्तान के अपने हित और भूमिका हैं। रूस के फैसले को पाकिस्तान के विरुद्ध कदम मानने के लिए अलग प्रमाण या आधिकारिक प्रतिक्रिया की जरूरत होगी। ऐसी प्रतिक्रिया या ठोस संकेत सामने नहीं आए हैं।




















