संसद में सोमवार को वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर विशेष चर्चा के दौरान माहौल अचानक गरमा गया। चर्चा में हिस्सा लेते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह उस समय नाराज हो गए जब उनके भाषण के बीच विपक्षी सांसदों ने शोर शुरू कर दिया। राजनाथ सिंह भारतीय मुस्लिमों की सोच और बंकिमचंद्र चटर्जी की भावना पर बात कर रहे थे, तभी कुछ सांसदों के शोर मचाने पर उनका धैर्य टूट गया।
राजनाथ सिंह ने तेज आवाज में प्रतिक्रिया दी और कहा कि कौन किसे बैठाएगा। यहां कोई किसी को चुप नहीं करा सकता। उन्होंने अध्यक्ष से भी हस्तक्षेप की मांग की। राजनाथ सिंह ने कहा कि संसद में किसी को भी बोलने का अधिकार है। अगर किसी की बात से असहमति है तो बाद में खड़े होकर प्रतिकार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शोर मचाना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है और वे हमेशा इस परंपरा का पालन करते आए हैं।
मुस्लिम लीग और कांग्रेस की तुलना में भारतीय मुसलमान की भावना अच्छी
इसके बाद उन्होंने अपने बयान को आगे बढ़ाया और कहा कि सच्चाई यही है कि भारतीय मुस्लिमों ने बंकिमचंद्र चटर्जी की भावना को कांग्रेस या मुस्लिम लीग के नेताओं की तुलना में बेहतर समझा। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की 150 साल की यात्रा गौरव का विषय है, लेकिन इस गीत के साथ न्याय उतना नहीं हुआ जितना होना चाहिए था।
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी यह गीत देश की भावना को जोड़ने का काम करता है। उन्होंने विपक्ष पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि इस गीत को लेकर कई बार गलतफहमियां पैदा की गईं।
संसद में हुई इस बहस ने एक बार फिर वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। आज की चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे के आरोपों का जवाब देने में जुटे नजर आए।





















