बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या का मामला अब भारत की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी बांग्लादेशी हाई कमीशन के बाहर जमा हुए और अपना गुस्सा जाहिर किया। प्रदर्शन में शामिल हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेश के बहिष्कार और हिंदुओं के लिए न्याय की मांग की। लोगों में आक्रोश इतना अधिक था कि प्रदर्शनकारियों ने शुरुआती बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और बांग्लादेश का पुतला फूंक दिया।
पहले से बढ़ा दी गई थी सुरक्षा
वीएचपी के इस प्रदर्शन की योजना के मद्देनजर पुलिस ने पहले ही इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी थी। हाई कमीशन के आसपास भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात थे। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी आगे बढ़ गए। हालांकि उन्हें हाई कमीशन के करीब पहुंचने से रोक दिया गया। यह प्रदर्शन पूरी तरह से बांग्लादेश में हुई एक घटना के विरोध में था।
कौन थे दीपू चंद्र दास?
पिछले हफ्ते बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा की एक नई लहर फैली। इसी दौरान मयमनसिंह के एक हिंदू युवक, दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई। उन्हें पहले मारा गया, फिर एक पेड़ से लटकाकर उनके शव को आग के हवाले कर दिया गया। इस नृशंस हत्या ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी।
दुनिया भर में उठ रही है आवाज
दीपू चंद्र दास की हत्या पर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आक्रोश है। अमेरिका से लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ तक, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे को उठाया जा रहा है। नेपाल में भी दीपू के लिए न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
भारत-बांग्लादेश तनाव में बढ़ोतरी
इस बीच बांग्लादेश में भारतीय हितों पर भी हमले की कोशिश हुई है। चटगांव में भारत के सहायक उच्चायोग पर प्रदर्शनकारियों ने धावा बोलने का प्रयास किया। इसके जवाब में भारत ने वीजा सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी हैं। भारत सरकार ने बांग्लादेश के एक वरिष्ठ राजनयिक को बुलाकर ढाका में भारतीय मिशन के आसपास असुरक्षा पैदा करने की कोशिशों पर गहरी चिंता जताई है।




















