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इंदौर में दूषित पानी का कहर! स्थानीय लोगों द्वारा 8 लोगों की मौत का दावा, भागीरथपुरा त्रासदी में मौत के आंकड़े को लेकर सच क्या है?

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देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी ने भीषण त्रासदी ला दी है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रशासन के बीच गहरा मतभेद है। जहां स्थानीय लोग पिछले एक सप्ताह में 8 लोगों की मौत का दावा कर रहे हैं वहीं प्रशासन ने अब तक केवल 3 मौतों की ही आधिकारिक पुष्टि की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से उल्टी और दस्त की बीमारी फैली। इसके बाद 6 महिलाओं समेत कुल 8 लोगों ने दम तोड़ दिया। वहीं प्रशासन ने केवल नंदलाल पाल उर्मिला यादव और तारा कोरी की मौत को ही डायरिया से जोड़कर स्वीकार किया है। इसके अलावा 100 से ज्यादा लोग बीमार पड़े हैं जिनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

नगर निगम के दो अधिकारी निलंबित

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी और सभी मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। इस पूरे मामले में सरकार ने कार्रवाई करते हुए नगर निगम के दो अधिकारियों को निलंबित किया है और एक सब इंजीनियर की सेवाएं समाप्त की हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिवार को दो दो लाख रुपये के मुआवजे और मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने की घोषणा की है। साथ ही एक आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति भी गठित कर दी गई है।

विपक्ष का सरकार पर आरोप

विपक्ष की आवाज इस पूरे प्रकरण में और मुखर हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि प्रशासन अपनी लापरवाही छिपाने के लिए मृतकों का सही आंकड़ा छिपा रहा है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने इंदौर की स्वच्छता की छवि पर गहरा दाग लगा दिया है और महज लीपापोती की जा रही है।

नगर निगम आयुक्त ने बताया कि पेयजल लाइन में शौचालय के पास लीकेज मिला है जिससे पानी दूषित होने की आशंका है। हालांकि मेयर ने कहा कि पूरी तस्वीर पानी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

बार-बार शिकायत के बावजूद नगर निगम नहीं जागा

भागीरथपुरा के प्रभावित निवासियों का आरोप है कि नगर निगम की लापरवाही और उदासीनता ने इस संकट को जन्म दिया है। उनका कहना है कि घर-घर में नर्मदा नदी का जो पानी नगर निगम के पाइपलाइन के जरिए पहुंचता था, वही दूषित था और उसके सेवन से ही लोग बीमार हुए।

निवासियों ने बताया कि नलों से गंदा पानी आने की उन्होंने कई बार अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस उपेक्षा का नतीजा यह हुआ कि पूरा समुदाय बीमारी की चपेट में आ गया।

इस मामले पर क्षेत्रीय पार्षद कमल बाघेला ने कहा, “स्थानीय लोग बता रहे हैं कि गुरुवार (25 दिसंबर) को आपूर्ति किए गए पानी से अजीब तरह की बदबू आ रही थी। संभव है कि लोग उसी पानी को पीने के कारण बीमार पड़े हों। पानी के नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि पानी दूषित हुआ कैसे।”

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