सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दिन को भगवान शिव और मां पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं के लिए यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
धार्मिक विश्वास है कि जो कन्याएं इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करती हैं, उन्हें योग्य और मनचाहा वर प्राप्त होता है। वहीं जिन लोगों की शादी लंबे समय से अटकी हुई है या बार-बार रिश्तों में बाधा आ रही है, वे भी इस दिन विशेष उपाय कर सकते हैं।
महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। पास में एक पात्र में शिवलिंग रखें और दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें।
अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और बेलपत्र, धतूरा तथा आक के फूल अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर भगवान शिव का ध्यान करें। यदि मंदिर में पूजा कर रहे हैं तो आवश्यक सामग्री पहले से तैयार करके ले जाएं ताकि भीड़ में जल्दबाजी न हो।
इसके बाद मां पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। भोग में खीर, फल और मिठाई चढ़ाएं। महाशिवरात्रि की कथा का पाठ करें और अंत में शिव चालीसा का पाठ तथा ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान काले या भूरे रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस विधि से श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से विवाह में आ रही अड़चनें दूर हो सकती हैं और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।




















