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Monday, March 2, 2026
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भागीरथपुरा दूषित पानी मामला: हाई कोर्ट सख्त, मुख्य सचिव तलब, मौतों के आंकड़ों पर सवाल

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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने साफ कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और इस तरह की लापरवाही को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के मुख्य सचिव को तलब किया है।

मंगलवार को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने भागीरथपुरा से जुड़ी सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। इनमें इंदौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी की याचिका भी शामिल थी। अदालत ने सभी पक्षों को सुनते हुए पूरे मामले को गंभीर बताया और अगली सुनवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।

कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य के मुख्य सचिव 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश हों और मामले से जुड़ी पूरी जानकारी दें। अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा है कि दूषित पानी की आपूर्ति कैसे हुई और इसे समय रहते रोका क्यों नहीं गया।

लोगों की मौत के आंकड़े पर कोर्ट हैरान

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले इंदौर में ऐसी घटना कैसे हो सकती है। रितेश इनानी ने अदालत को बताया कि नगर निगम की ओर से पेश की गई रिपोर्ट और याचिकाकर्ताओं द्वारा बताए गए मौतों के आंकड़ों में बड़ा अंतर है। जहां आधिकारिक रिपोर्ट में कम संख्या बताई गई, वहीं दूषित पानी से 15 से 17 लोगों की मौत का दावा किया गया।

हाई कोर्ट ने न केवल मौतों के सही आंकड़े स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं बल्कि यह भी कहा है कि यदि प्रभावित परिवारों को दिया गया मुआवजा अपर्याप्त पाया गया तो इस पर भी आगे आदेश जारी किए जा सकते हैं। अदालत ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है और पूरे मध्य प्रदेश में पेयजल की स्थिति पर चिंता जताई है।

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