धनतेरस दीपावली पर्व की शुरुआत का पावन दिन है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और धनवंतरी देव की विशेष पूजा की जाती है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार धनतेरस की शाम को चार विशेष कार्य करना बेहद शुभ माना गया है। इन कामों से घर में सुख-समृद्धि और स्थायी धन का वास होता है।
पहला कार्य है लक्ष्मी पूजन। धनतेरस की शाम 6 से 8 बजे के बीच मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्वास्तिक बनाएं और कमल के फूल, धनिया, सिक्के व मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। यह मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर घर में धन की वर्षा करता है।
दूसरा कार्य है यम दीपदान। मान्यता है कि यमराज को दीपदान देने से मृत्यु भय और दुर्घटना से रक्षा होती है। मुख्य द्वार के बाहर 14 दीपक जलाएं और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके “ॐ यमाय नमः” मंत्र का उच्चारण करें। तिल के तेल का दीपक इस पूजन में शुभ माना जाता है।
तीसरा कार्य है सोना, चांदी या बर्तन खरीदना। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन खरीदे गए धातु के सामान से लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं। उत्तर दिशा की ओर मुख करके खरीदारी करें और खरीदे हुए सामान को शाम की पूजा में मां लक्ष्मी को अर्पित करें। इससे आर्थिक स्थिरता और समृद्धि मिलती है।
चौथा कार्य है घर की सजावट। धनतेरस की शाम घर को आकर्षक ढंग से सजाना मां लक्ष्मी का स्वागत करने जैसा है। मुख्य द्वार पर तोरण और रंगोली बनाएं, 13 दीपक जलाएं और घर की उत्तर-पूर्व दिशा को साफ रखें। काले कपड़े या टूटे बर्तन घर में न रखें, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
इसके अलावा लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ सामग्री जैसे लाल कपड़ा, कमल गट्टा, सुपारी, पान, चंदन, नारियल और 21 प्रकार के मेवे तैयार करें। शास्त्र कहते हैं कि ये सामग्री मां लक्ष्मी को प्रसन्न करती हैं और धन की वृद्धि करती हैं। धनतेरस की शाम झगड़ा, कर्ज देना या बाल कटवाना अशुभ माना गया है, इसलिए इनसे बचें।





















