असम में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा के लिए यहां सत्ता बचाने की चुनौती है। अगर भगवा खेमा यहां सरकार बनाने में कामयाब होता है तो असम में यह हैट्रिक होगी। भाजपा ने इसके लिए पूरी ताकत लगा दी है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने हाल ही में पार्टी कार्यकर्ताओं को असम विधानसभा में 50 फीसदी वोट लाने का लक्ष्य दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 33.2 फीसदी था। वहीं सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही कांग्रेस को उस समय जबरदस्त झटका लगा जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी छोड़ दी।
अगर भाजपा अध्यक्ष के द्वारा दिए गए टारगेट को बीजेपी हासिल कर लेती है तो सभी दलों का सूपड़ा साफ कर देगी। विपक्ष सिर्फ 20 से 28 सीटों पर सिमट जाएगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की लोकप्रियता अभी भी बरकरार है। राज्य में अप्रैल महीने में चुनाव हो सकते हैं और भाजपा पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने की योजना बना रही है।
कांग्रेस की बात करें तो असम विधानसभा की राह बिल्कुल भी आसान नहीं है। वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा के इस्तीफे से जहां पार्टी आंतरिक चुनौती से जूझ रही है, वहीं महाजोत गठबंधन में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। सीट बंटवारे में ज्यादा से ज्यादा सीट हासिल करने को लेकर महाजोत के कई घटक दल दबाव बनाए हुए हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस असम में पार्टी को एकजुट रखने में विफल रही है। भूपेन बोरा ने आखिरकार पार्टी छोड़ दी।
पार्टी को डर है कि भूपेन बोरा के साथ उनके भरोसेमंद कई विधायक और नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इससे मतदाताओं में पार्टी की छवि कमजोर होगी। महाजोत में सीट बंटवारा भी कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। 2021 के महाजोत में कई बदलाव हुए हैं। AIUDF और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट दोनों महाजोत से अलग हो चुके हैं। बीपीएफ अब NDA का हिस्सा है। वहीं मौलाना बदरुद्दीन अजमल की अगुआई में AIUDF अकेले चुनाव लड़ेगा।
असम जातीय परिषद और अखिल गोगोई का रायजोर दल अब महाजोत में शामिल हैं। कांग्रेस ने एजेपी और रायजोर दल दोनों को महाजोत में 11-11 सीट देने की पेशकश की है। लेकिन दोनों दल इससे ज्यादा सीट की मांग कर रहे हैं। अगर कांग्रेस इन्हें अधिक सीट देती है तो चुनाव में कांग्रेस को कम सीट पर लड़ना होगा। असम में दूसरे दलों के साथ गठबंधन किए बगैर भाजपा की अगुआई वाले NDA को शिकस्त देना कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा, वरना भाजपा की हैट्रिक को रोकना मुश्किल होगा।



















