Bangladesh Brics Summit: ब्रिक्स सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान शामिल नहीं होंगे। ढाका की ओर से कोई प्रतिनिधि भी नहीं भेजा जाएगा। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत का निमंत्रण रहमान को बिम्सटेक अध्यक्ष के तौर पर सम्मेलन में भाग लेने के लिए था, द्विपक्षीय दौरे के लिए नहीं।
कबीर ने ढाका में पत्रकारों से कहा कि दोनों देशों के बीच यात्राओं के लिए आपसी सम्मान और अनुकूल माहौल जरूरी है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश द्विपक्षीय बातचीत और यात्राओं को अहमियत देता है, लेकिन ऐसे दौरे जल्दबाजी में तय करने की जरूरत नहीं है। यह फैसला भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव की खबरों के बीच आया है। ढाका ने रूस से ब्रिक्स सदस्यता की अपनी दावेदारी का समर्थन करने का अनुरोध किया था, लेकिन सम्मेलन में शामिल नहीं होने का फैसला किया।
बांग्लादेश ने निमंत्रण को द्विपक्षीय दौरा नहीं माना
हुमायूं कबीर ने कहा कि तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की ओर से आया निमंत्रण द्विपक्षीय यात्रा का प्रस्ताव नहीं था। बांग्लादेश सरकार के मुताबिक, बहुपक्षीय मंच पर भागीदारी और किसी देश के साथ द्विपक्षीय दौरा अलग-अलग बातें हैं।
प्रधानमंत्री बनने के बाद रहमान ने भारत आने का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया। उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए मलेशिया चुना और इसके बाद चीन गए। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली ने उन्हें बिम्सटेक अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स बैठक में आमंत्रित किया था। बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी के सात देशों का क्षेत्रीय संगठन है।
सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज से जुड़े इमरान अहमद ने निक्केई एशिया से कहा कि रहमान की गैरमौजूदगी को ब्रिक्स से बांग्लादेश की दूरी के बजाय भारत-बांग्लादेश संबंधों की मौजूदा मुश्किलों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। बांग्लादेश के एक पूर्व राजदूत ने भी कहा कि सम्मेलन में प्रधानमंत्री की मौजूदगी से नई सरकार को रूस और ईरान समेत दूसरे देशों के नेताओं से सीधे बातचीत का मौका मिल सकता था।
बांग्लादेश दूसरे विदेश नीति विकल्प भी तलाश रहा है
ब्रिक्स बैठक में शामिल नहीं होने के बीच बांग्लादेश सरकार ने मक्का सुरक्षा समझौते में शामिल होने की इच्छा भी जताई है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए इस समझौते में सामूहिक रक्षा की प्रतिबद्धता है: किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। बांग्लादेश को इसमें शामिल होने का निमंत्रण नहीं मिला है, हालांकि वहां के मंत्रियों और अधिकारियों ने इस संभावना में रुचि दिखाई है।
बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने समझौते में शामिल होने को देश का संप्रभु फैसला बताया है। पूर्व विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने, हालांकि, इस कदम के ठोस लाभ पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि भारत के साथ स्थिर संबंध बांग्लादेश के हित में हैं और किसी सैन्य व्यवस्था से क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, ढाका साझेदारों की संख्या बढ़ाने और विदेश नीति में अधिक विकल्प रखने की कोशिश कर रहा है। इमरान अहमद ने कहा कि इसका यह अर्थ जरूरी नहीं कि बांग्लादेश किसी नए भू-राजनीतिक खेमे में जा रहा है। उनके आकलन में बदलाव यह है कि क्षेत्रीय रिश्तों में भारत की केंद्रीय भूमिका पहले जैसी नहीं रह गई है।
















