कपिल सिब्बल ने पश्चिम बंगाल के 10 टीएमसी विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं पर स्पीकर के फैसले में देरी का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठाया। उन्होंने अदालत से फैसले के लिए समय-सीमा तय करने का आग्रह किया। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि दूसरे संवैधानिक संस्थानों को समय-सीमा का निर्देश देने से पहले न्यायपालिका को भी अपने लंबित मामलों और फैसलों में देरी पर विचार करना चाहिए।
ममता बनर्जी खेमे की ओर से पेश वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद सिब्बल ने कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने की तीन महीने की अवधि 8 अक्टूबर को पूरी हो जाएगी। उन्होंने इसे देरी का ऐसा पैटर्न बताया जो पहले शिवसेना से जुड़े मामले में भी सामने आया था। उनकी दलील थी कि अयोग्यता पर फैसला लंबित रहने से दल-बदल से जुड़े विवाद अनसुलझे रहते हैं।
अयोग्यता याचिकाओं पर समय-सीमा की मांग
पश्चिम बंगाल विधानसभा के 10 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं 8 जुलाई को दायर की गई थीं। इन विधायकों ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी से अलग होकर एक समूह बनाया है। याचिकाकर्ता पक्ष चाहता है कि विधानसभा अध्यक्ष मामले में जल्द फैसला करें और अदालत इसके लिए समय-सीमा तय करे।
सिब्बल ने आशंका जताई कि अयोग्यता के मामले में देरी के दौरान संबंधित विधायक चुनाव आयोग के पास जाकर आदेश हासिल कर सकते हैं। उन्होंने अदालत से इस तरीके पर विचार करने को कहा। यह सिब्बल की दलील थी; पीठ ने सुनवाई में इस पैटर्न को स्थापित तथ्य के तौर पर घोषित नहीं किया।
सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि वह मामले का निपटारा इस उम्मीद के साथ करेगी कि विधानसभा अध्यक्ष केशम मेघचंद्र सिंह मामले में तय कानूनी सिद्धांतों का पालन करेंगे। पीठ ने कहा कि उसे यह मानने का कारण है कि अध्यक्ष उस फैसले और उसके तहत बने ढांचे से परिचित हैं और उसी के अनुरूप उचित निर्णय लेने की कोशिश करेंगे।
पीठ ने न्यायपालिका की जिम्मेदारी का भी जिक्र किया
सिब्बल ने देरी के पैटर्न की जांच की बात कही तो जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने समय-सीमा के पालन को लेकर न्यायपालिका की अपनी स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों का तेजी से निपटारा होना चाहिए, लेकिन न्यायपालिका भी इस जिम्मेदारी में चूक कर रही है। उनका कहना था कि दूसरे संस्थानों को निर्देश देने से पहले अदालतों को अपने काम की गति पर भी नजर डालनी चाहिए।
सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने हुई। अदालत ने स्पीकर के लिए कोई नई समय-सीमा तय करने की घोषणा नहीं की। उसने मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत निर्णय किए जाने की अपेक्षा जताई। अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने की अवधि 8 अक्टूबर को समाप्त होनी है। सुनवाई के समय स्पीकर के फैसले की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई थी।
















