नई दिल्ली: चुनाव आयोग की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में SIR से जुड़े कुछ फैसलों और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में कथित बदलावों की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता का दावा है कि कुछ फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिका में ऐसे फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
Form 6 में बदलाव पर भी सवाल
याचिका में मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में कथित बदलाव का मुद्दा भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने मूल वैधानिक Form 6 को बहाल करने की मांग की है।
इसके अलावा याचिका में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावे की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने इसके लिए Special Investigation Team यानी SIT या न्यायिक जांच का सुझाव दिया है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
याचिका में उन मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया गया है, जिनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा SIR से संबंधित फैसलों पर कथित तौर पर कई लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई थी।
The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से संबंधित फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं। यानी एक तरफ याचिका और मीडिया रिपोर्टों में असहमति के दावे हैं, वहीं आयोग इन फैसलों को सामूहिक निर्णय बताता है।

















