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Sunday, July 5, 2026
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मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने की मध्यप्रदेश के एसआईआर अभियान की सराहना, बताया देश के लिए आदर्श

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ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया विश्व की सबसे पारदर्शी और विश्वसनीय प्रक्रियाओं में से एक है। मतदाता सूची निर्माण से लेकर मतदान और मतगणना तक प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है।

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आज इंदौर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से सीधा संवाद करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) एवं मतदाता सूची के परिशोधन का कार्य अत्यंत पारदर्शी, सुलभ और व्यवस्थित तरीके से संपन्न किया है। उन्होंने कहा कि जिस दक्षता और पारदर्शिता के साथ यह कार्य मध्यप्रदेश में हुआ है, वैसा उदाहरण देश के अन्य राज्यों में दुर्लभ है।

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया विश्व की सबसे पारदर्शी और विश्वसनीय प्रक्रियाओं में से एक है। मतदाता सूची निर्माण से लेकर मतदान और मतगणना तक प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने कहा कि इसी पारदर्शिता और दक्षता के कारण भारत आज विश्व के 35 प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के संगठन इंटरनेशनल आइडिया (International IDEA) की 2026 की अध्यक्षता कर रहा है।

इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश संजीव कुमार झा, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राम प्रताप सिंह जादौन तथा कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार

बीएलओ लोकतंत्र की रीढ़, हर पात्र मतदाता तक पहुंच जरूरी

ज्ञानेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि निर्वाचन आयोग का विशेष ध्यान वृद्धजन, दिव्यांगजन, प्रवासी श्रमिक, अशिक्षित नागरिकों तथा वंचित समुदायों तक मतदाता सेवाएं पहुंचाने पर केंद्रित रहा है, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी अपात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो। इसके लिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान सफलतापूर्वक चलाया गया।

उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग ने सरल भाषा में दिशा-निर्देश, सोशल मीडिया जागरूकता अभियान, समाचार पत्र, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप, पंचायत स्तरीय बैठकों और मोहल्ला सूचना अभियानों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता चलाई।

उन्होंने बीएलओ की भूमिका को लोकतंत्र की रीढ़ बताते हुए कहा कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क स्थापित करते हैं, नए मतदाताओं का पंजीयन करते हैं तथा मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अनुपस्थित मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सुदूर आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में कार्य करने वाले बीएलओ की सराहना की।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार

95 करोड़ मतदाता, 1.80 करोड़ चुनावकर्मी निभाते हैं जिम्मेदारी

ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत में चुनाव संचालन विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया है। देश में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं और चुनाव प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में 1 करोड़ 80 लाख चुनावकर्मी शामिल होते हैं। यह संख्या दुनिया की कई बड़ी सरकारी और निजी संस्थाओं से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि इतने विशाल स्तर पर भी भारत की चुनाव प्रणाली पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

उन्होंने चुनाव आयोग के डिजिटल नवाचारों का उल्लेख करते हुए ‘ईसीआई नेट’ (ECI Net) एप को पारदर्शिता और सुगमता की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह एप बीएलओ और मतदाताओं के बीच सीधे संपर्क का माध्यम बना है तथा देश के दूरस्थ क्षेत्रों में भी इसका सफल उपयोग हो रहा है। मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता समझाते हुए उन्होंने बताया कि मतदान शुरू होने से पहले मॉक पोल, मतदान के दौरान पोलिंग एजेंट की उपस्थिति, फॉर्म 17-सी के माध्यम से रिकॉर्ड सत्यापन और मतगणना के दौरान एजेंटों की मौजूदगी भारत की चुनाव प्रणाली को अत्यंत विश्वसनीय बनाती है।

उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र केवल आकार में ही नहीं, बल्कि सहभागिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के मामले में भी सबसे सशक्त है। विभिन्न देशों के मतदान प्रतिशतों की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में स्वैच्छिक मतदान होने के बावजूद मतदान प्रतिशत कई अनिवार्य मतदान वाले देशों से अधिक रहता है, जो लोकतंत्र में जनता के विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से मतदाता सूची को शुद्ध करना संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुरूप निर्वाचन आयोग का संवैधानिक दायित्व है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं को चिन्हित कर सूची को अधिक शुद्ध और विश्वसनीय बनाया गया है।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार

मध्यप्रदेश बना एसआईआर अभियान का राष्ट्रीय मॉडल

ज्ञानेश कुमार ने मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के नेतृत्व में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हुए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने इस अभियान को उत्कृष्टता के साथ पूरा कर देश के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी बीएलओ को लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी बताते हुए उनके समर्पण, परिश्रम और संवैधानिक जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि सशक्त मतदाता ही सशक्त लोकतंत्र की नींव है। बीएलओ से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए प्रेरणा है और इसकी मजबूती में बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम (एसआईआर) की उपलब्धियों, नवाचारों और सफलताओं पर आधारित एक विशेष कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर बीएलओ ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से सीधा संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार जमीनी स्तर पर मतदाता सूची के परिशोधन और अद्यतन कार्य को सफलतापूर्वक संपादित किया गया। संवाद के दौरान ज्ञानेश कुमार ने बीएलओ के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार

संजीव कुमार झा बोले- सामूहिक प्रयासों से मिली बड़ी सफलता

कार्यक्रम में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश संजीव कुमार झा ने कहा कि मध्यप्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। उन्होंने कहा कि यह कार्य पूरी टीम की सामूहिक मेहनत और समर्पण का परिणाम है तथा इस उपलब्धि के लिए सभी अधिकारियों और बीएलओ को बधाई दी। उन्होंने बताया कि भारत इस वर्ष International IDEA की अध्यक्षता कर रहा है और भारत निर्वाचन आयोग की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को वैश्विक स्तर पर साझा किया जाएगा, जो देश के लिए गर्व का विषय है।

संजीव कुमार झा ने कहा कि मध्यप्रदेश भौगोलिक और सामाजिक विविधताओं से भरा राज्य है, जिसके कारण मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान में कई चुनौतियां सामने आईं। वर्ष 2003 के पुराने डेटा को वर्तमान सॉफ्टवेयर सिस्टम के अनुरूप परिवर्तित करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए विभाग ने पहले से तैयारी शुरू कर दी थी।

उन्होंने बताया कि नए निर्देशों के तहत स्थानीय क्षेत्र के बीएलओ की नियुक्ति की गई, जिससे कई पुराने शिक्षकों की जगह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों और अन्य मैदानी कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई। उनकी क्षमता वृद्धि के लिए विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए गए। उन्होंने प्रदेश में हुए कार्यों और प्राप्त उपलब्धियों की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की सफलता कलेक्टरों, संभागायुक्तों, बीएलओ, राजनीतिक दलों और निर्वाचन टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने बीएलओ को लोकतंत्र की प्रथम कड़ी बताते हुए कहा कि मतदाता सबसे पहले उन्हीं से संपर्क करता है। इसलिए उनकी जिम्मेदारी है कि मतदाता सूची को निरंतर अद्यतन और शुद्ध बनाए रखें। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा बीएलओ के मानदेय को 6 हजार रुपये तक बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे उनकी भूमिका और अधिक सशक्त होगी। अंत में उन्होंने सभी से आयोग के दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा और मनोयोग से पालन करने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी शिवम वर्मा ने आभार व्यक्त किया।

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