देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET को लेकर हुए विवाद और पेपर लीक के मामलों के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार की प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट की नजर बनी हुई है। हालिया सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से पूछा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के क्रियान्वयन का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अदालत ने यह जानने की इच्छा जताई कि परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक सुधारों को लागू करने की दिशा में क्या प्रगति हुई है।
पेपर लीक के बाद बनी थी समिति
NEET परीक्षा को लेकर सामने आए विवादों और कथित पेपर लीक प्रकरणों के बाद केंद्र सरकार ने विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति की अध्यक्षता पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन ने की थी।
समिति को परीक्षा प्रणाली की खामियों की पहचान करने और सुधार संबंधी सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति ने परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और उम्मीदवार सत्यापन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे।
केंद्र और NTA से मांगी गई जानकारी
सुनवाई के दौरान अदालत ने NTA और केंद्र सरकार से पूछा कि समिति की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में क्या कार्रवाई की गई है। अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर किसी तरह की अनियमितता या सुरक्षा संबंधी चिंता सामने न आए।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा था कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी कारण अदालत समय-समय पर मामले की समीक्षा कर रही है।
परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने पर जोर
केंद्र सरकार ने NEET विवाद के बाद परीक्षा तंत्र को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाने की बात कही थी। इनमें डिजिटल निगरानी बढ़ाना, परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना, पहचान सत्यापन प्रक्रिया को बेहतर बनाना और तकनीकी सुधार शामिल हैं।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समिति की सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को और मजबूती मिल सकती है।

















