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Monday, April 6, 2026
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रामावतार जग्गी हत्याकांड: पूर्व CM के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें हत्या और आपराधिक साजिश के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा शामिल थे, ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 120बी के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

सजा के साथ जुर्माना भी तय

अदालत ने अमित जोगी को उम्रकैद के साथ 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं चुकाने की स्थिति में छह महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

यह फैसला उस निर्णय को पलटता है, जो 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने दिया था। उस समय साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था, जबकि अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।

हाईकोर्ट की टिप्पणी और कानूनी आधार

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने इस स्थिति को विधिक रूप से त्रुटिपूर्ण माना।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा शुरू हुई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में विस्तृत सुनवाई की गई, जिसमें पक्षकारों की ओर से कई महत्वपूर्ण तर्क रखे गए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा सुनवाई

मामले में पुनर्विचार की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्यों को प्रभावित किया गया था, जिससे मामले की निष्पक्षता पर सवाल उठे।

अदालत के समक्ष यह भी कहा गया कि केवल भौतिक साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपियों को राहत देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे घटनाक्रम और साजिश की कड़ियों को समझना जरूरी है।

क्या था पूरा मामला

4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से जुड़े नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

जांच और ट्रायल के दौरान कुछ आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। उस समय अमित जोगी को बरी कर दिया गया था, जिसे बाद में चुनौती दी गई।

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