West Bengal SIR Case: श्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर बुधवार को Supreme Court of India में सुनवाई के दौरान असाधारण नजारा देखने को मिला। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं अदालत में उपस्थित हुईं और सीधे मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच के सामने अपनी बात रखी।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि SIR की प्रक्रिया के जरिए जानबूझकर पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमें कहीं भी न्याय नहीं मिल रहा। हमने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे। मैं एक बंधुआ मजदूर हूं, अपनी पार्टी और अपने लोगों के लिए लड़ रही हूं।”
मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने भी अदालत में दलीलें रखीं। Bar and Bench की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 32 लाख वोटर अनमैप्ड, 1.36 करोड़ नाम लॉजिकल एरर लिस्ट में और 63 लाख मामलों में सुनवाई लंबित है। उनका कहना था कि सुधार के लिए बेहद कम समय छोड़ा गया है।
वकील ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई मामलों में नाम या पिता के नाम के बंगाली-अंग्रेजी अनुवाद में मामूली अंतर के कारण वोटर को संदिग्ध घोषित कर दिया गया। जैसे– चिराग टिबरेवाल के मामले में पिता के नाम में ‘कुमार’ शब्द की वजह से गड़बड़ी बताई गई, वहीं अजीमुद्दीन खान के केस में बंगाली से अंग्रेजी ट्रांसलेशन को आधार बनाया गया।
खुद दलील रखते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल नाम जोड़ने के बजाय सिर्फ नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शादी के बाद ससुराल जाने वाली बेटियों, जगह बदलने वाले गरीब परिवारों और फ्लैट शिफ्ट करने वाले लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले केवल पश्चिम बंगाल में इतनी तेज़ी से यह प्रक्रिया चलाई जा रही है, जबकि असम जैसे अन्य राज्यों में ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने दावा किया कि दो साल में होने वाला काम दो महीने में जबरन किया जा रहा है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission of India को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई सोमवार को होगी। इस याचिका में ममता बनर्जी के साथ-साथ टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेन और मोस्तारी बानू भी पक्षकार हैं।


















