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डॉ. पाखमोडे केस से लें सीख? सीने के दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, कैसे बचें

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नागपुर के जाने-माने न्यूरोसर्जन डॉ. चंद्रशेखर पाखमोडे के अचानक निधन ने न सिर्फ चिकित्सा जगत, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 31 दिसंबर की सुबह करीब 5 बजे उठने के बाद उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द हुआ। उन्होंने तुरंत अपनी पत्नी डॉ. मनीषा पाखमोडे जो पेशे से एनेस्थेटिस्ट हैं, उनको इसकी जानकारी दी और कुछ ही पलों में बेहोश होकर गिर पड़े।

डॉ. मनीषा ने बिना देर किए तुरंत CPR शुरू किया और अस्पताल को डिफिब्रिलेटर के साथ एंबुलेंस भेजने के लिए कहा। करीब 20 मिनट बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने लगभग दो घंटे तक उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

क्या थी मौत की वजह

डॉक्टरों के अनुसार, डॉ. पाखमोडे को वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन हुआ था। यह एक गंभीर स्थिति होती है, जिसमें दिल की धड़कन पूरी तरह अनियंत्रित हो जाती है और दिल शरीर में खून पंप नहीं कर पाता। इसी कारण उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया।

न डायबिटीज, न हाई BP—फिर भी हार्ट अटैक

इस मामले ने डॉक्टरों को सबसे ज्यादा इसलिए हैरान किया, क्योंकि डॉ. पाखमोडे को न डायबिटीज थी और न हाई ब्लड प्रेशर। दो साल पहले उन्होंने एहतियातन CT कोरोनरी एंजियोग्राफी भी कराई थी, जिसमें कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई थी।

ECG भी था सामान्य

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, मौत से महज तीन दिन पहले सर्जरी के दौरान उन्हें सीने में हल्की तकलीफ हुई थी। उस समय ECG कराया गया, जो नॉर्मल आया। उन्होंने इसे काम की थकान मानकर नजरअंदाज कर दिया और आगे कोई जांच नहीं कराई।

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अनिल जवाहरानी के अनुसार, “सीने में दर्द एक गंभीर चेतावनी हो सकता है। केवल नॉर्मल ECG आने का मतलब यह नहीं कि हार्ट अटैक नहीं हो रहा। ऐसे मामलों में ट्रोपोनिन ब्लड टेस्ट बेहद जरूरी होता है, जिससे दिल की मांसपेशियों को हुए नुकसान का पता चलता है।”

नींद की कमी और अत्यधिक तनाव

डॉ. जवाहरानी ने बताया कि डॉ. पाखमोडे मौत से एक रात पहले ढाई बजे एक इमरजेंसी कॉल पर गए थे। लगातार ज्यादा काम, अत्यधिक मानसिक तनाव और नींद की कमी दिल की धमनियों में सूजन या ब्लॉकेज को अचानक जानलेवा बना सकती है।

एक आशंका यह भी जताई जा रही है कि उन्हें Spontaneous Coronary Artery Dissection (SCAD) हुआ हो। इस स्थिति में दिल की नस की अंदरूनी परत में अचानक दरार आ जाती है, जिससे खून का बहाव रुक जाता है। यह समस्या अक्सर अत्यधिक तनाव और शारीरिक थकावट में देखी जाती है।

काम का अत्यधिक दबाव

डॉ. पाखमोडे देश के प्रसिद्ध न्यूरोसर्जनों में गिने जाते थे। उनके दो अस्पताल थे और बताया जाता है कि वे रोजाना 8–9 सर्जरी करते थे। इसके अलावा 100 से ज्यादा मरीज भी देखते थे। उनकी मौत ने मेडिकल प्रोफेशन में काम के दबाव और डॉक्टरों की खुद की सेहत पर नई बहस छेड़ दी है।

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