उत्तर प्रदेश में स्थित JS विश्वविद्यालय की मान्यता योगी कैबिनेट द्वारा रद्द किए जाने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप की स्थिति है। इस फैसले से सबसे ज्यादा असर छात्रों और कर्मचारियों पर पड़ा है। छात्रों के मन में अपनी डिग्री की वैधता और भविष्य को लेकर गहरी चिंता दिखाई दे रही है। कई छात्रों का कहना है कि अब वे जहां भी अपनी डिग्री लेकर जाएंगे, वहां उन्हें शक की नजर से देखा जाएगा।
छात्रों ने बताया कि उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उनकी डिग्री को फर्जी न कहा जाए। हालांकि, उन्हें इस बात से कुछ राहत जरूर मिली है कि प्रदेश सरकार ने छात्रों के हित में पढ़ाई और परीक्षा सत्र पूरे कराने का आश्वासन दिया है। सरकार ने Dr Bhimrao Ambedkar University की निगरानी में एक त्रिस्तरीय प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है, जो परीक्षा से लेकर शैक्षणिक फैसलों तक की जिम्मेदारी संभालेगी।
इसके बावजूद छात्रों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी डिग्री की अहमियत नौकरी के बाजार में कितनी रहेगी। छात्रों का कहना है कि उन्हें हर जगह यह सफाई देनी पड़ेगी कि उनकी डिग्री पूरी तरह वैध है। ऐसे में सरकार को इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए ताकि भविष्य में छात्रों को किसी तरह की परेशानी न हो।
कई छात्रों ने यह चिंता भी जताई है कि कैंपस प्लेसमेंट का क्या होगा। विश्वविद्यालय में चल रहे कई कोर्स ऐसे हैं, जिनमें चयन प्रक्रिया कैंपस के माध्यम से होती है और बड़ी कंपनियां चयन के लिए आती हैं। छात्रों का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद कंपनियों का भरोसा कम न हो, इस पर सरकार और आगरा विश्वविद्यालय को ध्यान देना चाहिए।
विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि छात्रों की पढ़ाई पूरी होने तक तो व्यवस्था स्पष्ट है, लेकिन उसके बाद उनकी नौकरी का क्या होगा, इस पर कोई जवाब नहीं है। कई वर्षों से विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को डर है कि मान्यता रद्द होने के बाद उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ सकता है। वे सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनके भविष्य को लेकर भी स्पष्ट नीति बनाई जाए।




















