मुख्य बिंदु:
- सोनिया गांधी ने कहा, मोदी सरकार ने पिछले 11 साल से मनरेगा को कमजोर करने की कोशिश की।
- उन्होंने आरोप लगाया कि नए विधेयक को बिना विचार-विमर्श या विपक्ष को साथ लाए पारित किया गया।
- सोनिया गांधी ने कहा कि कांग्रेस इस “काले कानून” के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने मनरेगा योजना में बड़े बदलाव को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया है। शनिवार को जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर बुलडोजर चला दिया।
सोनिया गांधी ने कहा कि 20 साल पहले मनमोहन सिंह की सरकार ने यह क्रांतिकारी कानून बनाया था। इससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों को फायदा हुआ था। उन्होंने कहा कि इससे गरीबों को रोजी-रोटी का जरिया मिला और पलायन पर रोक लगी।
उन्होंने मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सोनिया गांधी ने कहा कि पिछले 11 साल में मोदी सरकार ने मनरेगा को कमजोर करने की हर कोशिश की। उन्होंने कहा कि कोविड के समय यह योजना गरीबों के लिए संजीवनी साबित हुई थी।
जी राम जी विधेयक को चुनौती
कांग्रेस नेता ने नए ‘जी राम जी’ विधेयक के तरीके को भी चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका रूप-स्वरुप बिना विचार-विमर्श के बदल दिया गया। सोनिया गांधी ने कहा कि अब रोजगार के बारे में फैसला दिल्ली में बैठकर होगा।
सोनिया गांधी ने साफ कहा कि मनरेगा पार्टी से जुड़ा मामला नहीं था। यह देशहित और जनहित से जुड़ी योजना थी। उन्होंने कहा कि नए कानून ने किसानों, श्रमिकों और भूमिहीन गरीबों के हितों पर हमला किया है।
उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस इस हमले का मुकाबला करने के लिए तैयार है। सोनिया गांधी ने कहा, “20 साल पहले अपने गरीब भाई-बहनों को रोजगार का अधिकार दिलवाने के लिए मैं भी लड़ी थी, आज भी इस काले कानून के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हूं।”
नए विधेयक का किया विरोध
इससे एक दिन पहले पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नए विधेयक का विरोध किया था। राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के बीस वर्षों को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक राज्यविरोधी और गांवविरोधी है।
राहुल गांधी ने कहा था कि नया कानून अधिकार-आधारित गारंटी को खत्म कर देता है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण मजदूर को मोलभाव की ताकत दी थी। नए विधेयक से यह ताकत खत्म हो जाएगी।
‘विकसित भारत- जी राम जी’ विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया है। यह विधेयक मनरेगा की जगह लेगा। विपक्षी दलों ने इस विधेयक का सदन में कड़ा विरोध किया था।





















