मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी सफलता हाथ लगी है। शनिवार देर रात करीब 11 बजे 77 लाख के इनामी कबीर समेत 10 नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। बताया जा रहा है कि सभी नक्सली एमएमसी जोन के केबी डिवीजन से जुड़े हैं। इसमें चार महिला और छह पुरुष नक्सली शामिल हैं। सरेंडर की प्रक्रिया गुप्त तरीके से हुई और सभी को रात में ही पुलिस लाइन ले जाया गया जहां उनसे पूछताछ जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, नक्सलियों का सरेंडर एक फॉरेस्ट गार्ड की मदद से संभव हो पाया। नक्सलियों ने पहले हॉक फोर्स से संपर्क किया और फिर बालाघाट रेंज आईजी के दफ्तर पहुंचकर हथियार डाल दिए। अधिकारियों का कहना है कि इस साल सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के बाद नक्सलियों का नेटवर्क कमजोर पड़ा है। 2025 में ही 2300 से अधिक एंटी नक्सल ऑपरेशन चले और आठ नक्सली मारे गए जबकि दो दर्जन से ज्यादा ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना।
35 साल से फैला था नक्सल आतंक
बालाघाट में नक्सल आतंक करीब 35 साल से फैला था। हाल के महीनों में इसका असर तेजी से घटा है। दिसंबर की इस रात को हुआ सरेंडर राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा माना जा रहा है। प्रमुख नक्सली सरगना कबीर उर्फ महेंद्र छत्तीसगढ़ के सुकमा का रहने वाला है और तीन राज्यों में मोस्ट वांटेड था। साथ ही नवीन, राकेश, समर उर्फ राजू आत्राम, लालसू, शिल्पा, जयशीला, जरीना, सोनी, जानकी और विक्रम जैसे नाम भी सामने आए हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
सरेंडर से पहले हुई थी मुठभेड़
सूत्रों ने बताया कि सरेंडर से कुछ घंटे पहले छत्तीसगढ़ सीमा से लगी लांजी में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसके तुरंत बाद कई नक्सली सरेंडर के लिए सामने आए। कहा जा रहा है कि नई समर्पण नीति लागू होने के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में बालाघाट में नक्सली औपचारिक रूप से अपने हथियार सौंपेंगे।
केंद्र सरकार मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की डेडलाइन दे चुकी है। इसके बाद से सुरक्षा बलों ने अपने ऑपरेशन तेज किए हैं। हाल ही में नक्सली सुनीता ओयाम, जीआरबी डिवीजन के 11 नक्सली और धनुष दंपत्ति ने भी सरेंडर किया था। हालांकि इस संघर्ष में हॉक फोर्स के इंस्पेक्टर आशीष शर्मा ऑपरेशन के दौरान शहीद हो गए थे।


















