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Supreme Court का निर्देश: शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों में आवारा कुत्तों का प्रवेश रोका जाए, निर्धारित आश्रयों में ले जाने के आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में शैक्षणिक केंद्रों, अस्पतालों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को तुरंत रोका जाए और जो कुत्ते पकड़े जाएं, उन्हें वापस उसी जगह पर नहीं छोड़ा जाए।

संस्थानों और अस्पतालों में आवारा कुत्तों पर रोक

अदालत ने कहा कि सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अस्पतालों में कुत्तों के प्रवेश को नियंत्रित करना जरूरी है ताकि ऐसे स्थानों पर छात्रों, मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पीठ ने कहा कि ऐसे कुत्तों को पकड़कर निर्धारित पशु आश्रयों में भेजा जाए और स्थानीय प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि वे दोबारा उसी परिसर में न लौटें। अदालत ने यह भी कहा कि इन संस्थानों के अधिकारी इस दिशा में समन्वित प्रयास करें और परिसर में भोजन या कचरे की अनियंत्रित उपलब्धता को रोकें, जिससे कुत्ते वहां आकर्षित न हों।

राजमार्गों से मवेशी और आवारा पशु हटाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने केवल शहरी संस्थानों तक ही सीमित न रहते हुए राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर भी ध्यान दिया। पीठ ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि सड़कों और राजमार्गों से मवेशियों और आवारा पशुओं को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। अदालत ने कहा कि इन क्षेत्रों की पहचान की जाए जहां बार-बार पशु और कुत्ते सड़क पर देखे जाते हैं, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके। यह आदेश इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई राज्यों में हाल के महीनों में सड़क दुर्घटनाओं में आवारा पशुओं की भूमिका सामने आई थी।

स्वत: संज्ञान मामला और आगे की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट यह मामला स्वत: संज्ञान के तहत सुन रही है, जिसकी शुरुआत 28 जुलाई को दिल्ली में एक व्यक्ति की रेबीज से मौत की मीडिया रिपोर्ट के बाद हुई थी। तब अदालत ने इसे केवल राजधानी तक सीमित न रखते हुए पूरे देश में लागू करने योग्य माना और सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को मामले में पक्षकार बनाया। अदालत ने 3 नवंबर को भी कहा था कि संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों के काटने का खतरा गंभीर है, खासकर जब कुछ लोग इन कुत्तों को भोजन देकर परिसर में प्रोत्साहित करते हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि मानव सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस दिशा में प्रशासन को तेजी से कदम उठाने चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी के लिए तय की है।

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