इंदौर की सड़कों पर इन दिनों राजनीति नहीं, बल्कि संपत्तियों और रजिस्ट्री को लेकर टकराव दिखाई दे रहा है। शनिवार को नगर निगम की टैक्स सर्वे टीम जब पिपलियाराव क्षेत्र में संपत्ति रिकॉर्ड सुधारने और अवैध निर्माण की नपती करने पहुंची, तो मामला अचानक तनावपूर्ण हो गया। नगर निगम के बिल्डिंग रेवेन्यू ऑफिसर (बीआरओ) शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम सर्वे कर रही थी। इसी दौरान स्थानीय निवासी बीरम सोलंकी ने आपत्ति जताई और क्षेत्र के पार्षद पति सुनील हार्डिया को मौके पर बुला लिया।
कुछ ही देर में हार्डिया और उनके समर्थक बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए और निगम टीम के साथ विवाद, नारेबाजी और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालात को देखते हुए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। निगम अधिकारियों का कहना है कि टीम सिर्फ टैक्स रिकॉर्ड सुधारने, अवैध मंजिलों की जांच करने और जिन घरों में जरूरत है, वहां नल कनेक्शन प्रदान करने के लिए गई थी। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यवाही पूरे शहर में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चल रही है।
दूसरी ओर, हार्डिया और उनके समर्थकों का आरोप है कि अधिकारी घरों में बिना अनुमति प्रवेश कर रहे थे और अभद्र व्यवहार कर रहे थे। इस विवाद के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। भंवरकुआं थाना परिसर देर रात तक राजनीतिक कार्यकर्ताओं, निगम कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की भीड़ से भरा रहा। निगम की ओर से सरकारी कार्य में बाधा का मामला दर्ज किया गया है, जबकि विपक्षी पक्ष ने अफसरों पर अभद्रता और दबाव का आरोप लगाया है।
नगर निगम के कर्मचारियों में नाराजगी
नगर निगम के कर्मचारियों में इस घटना के बाद नाराजगी देखी गई। उनका कहना है कि यदि वे अपने कर्तव्य का पालन करते हैं तो विरोध और दबाव का सामना करना पड़ता है, और यदि कार्रवाई न करें तो शहर में अव्यवस्था बढ़ेगी। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि शहर में ऐसे हजारों मामले हैं जिनमें गलत टैक्स एंट्री, अनियमित निर्माण और अवैध मंजिलों का मुद्दा सामने आता है। इन मामलों को सुधारना आवश्यक है, ताकि शहरी प्रबंधन सुचारू रूप से चल सके।
इंदौर में पिछले कुछ वर्षों में तेज शहरी विस्तार और अव्यवस्थित निर्माण बढ़ा है। कई वार्डों में ऐसी स्थिति बन चुकी है कि संकरी गलियों में दमकल वाहन तक प्रवेश नहीं कर पाता। बरसात के दौरान जलभराव की शिकायतें भी इसी अनियंत्रित निर्माण और गलत टैक्स रिकॉर्ड से जुड़ी पाई गई हैं। नगर निगम की वर्तमान सख्ती इसी व्यापक समस्या को व्यवस्थित करने का प्रयास है।
हालांकि, इस कार्यवाही के राजनीतिक पहलू भी सामने आए हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ प्रभावशाली व्यक्ति और जनप्रतिनिधि अवैध निर्माण और टैक्स छूट को अपने वोट बैंक से जोड़ते रहे हैं। ऐसे में जब रिकॉर्ड सुधार की कार्यवाही उनके क्षेत्रों में शुरू होती है, तो इसे अक्सर “जनता के हितों” के नाम पर विरोध का रूप दे दिया जाता है।
वर्तमान स्थिति में विवाद सिर्फ पिपलियाराव क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की शहरी व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़ा व्यापक सवाल बन चुका है। अंततः फैसला जनता को करना होगा कि प्राथमिकता विकास व्यवस्था है या राजनीतिक लाभ के लिए नियमों की अनदेखी।

















