World Largest Sanatan Sansad: धर्मनगरी हरिद्वार अब एक ऐतिहासिक अध्याय की गवाह बनने जा रही है। यहां तीर्थ सेवा न्यास की ओर से “विश्व की सबसे बड़ी सनातन संसद” बनाने की योजना पर काम शुरू हो रहा है। परियोजना के संरक्षक बाबा हठयोगी ने बताया कि इसका निर्माण कार्य 21 नवंबर 2025 से शुरू होगा।
करीब 100 एकड़ में फैली इस संसद का कुल बजट 1000 करोड़ रुपए निर्धारित किया गया है और इसे 2032 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
108 संतों के लिए बनेगा आध्यात्मिक परिसर
सनातन संसद परिसर में 108 संतों के लिए आधुनिक और पारंपरिक शैली में कुटिया (spiritual cottages) तैयार की जाएंगी। यहां सनातन संसद भवन, एक विशाल ध्यान केंद्र (Meditation Centre) और 13 अखाड़ों से जुड़ी जानकारी और उद्देश्यों को प्रदर्शित करने वाले हॉल भी होंगे।
परिसर के भीतर चारों शंकराचार्य पीठों के लिए “प्रेरणा परिसर” भी स्थापित किया जाएगा, जो सनातन परंपराओं की एकता और विरासत का प्रतीक बनेगा।
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत एक विशाल गुरुकुल (Vedic Education Campus) भी बनाया जाएगा, जिसमें 10,000 से अधिक विद्यार्थी वेद, उपनिषद, दर्शन और संस्कृत की शिक्षा लेंगे। गुरुकुल का उद्देश्य वैदिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ना और भावी पीढ़ियों तक भारतीय सभ्यता का संदेश पहुंचाना है।
आम श्रद्धालुओं के लिए 1000 कमरे और आधुनिक सुविधाएं
सनातन संसद में आम श्रद्धालुओं के लिए 1000 कमरों वाला विशाल आवासीय परिसर तैयार किया जाएगा। इसके अलावा 108 तीर्थ स्थलों का परिक्रमा पथ (Pilgrimage Path), गो संरक्षण केंद्र (Cow Protection Zone) और स्वरोजगार प्रशिक्षण केंद्र (Self Employment Training Centre) भी इस परियोजना का हिस्सा होंगे। यह परिसर श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आत्मनिर्भरता का केंद्र बनेगा।
एक लाख लोगों को मिलेगा शस्त्र प्रशिक्षण
परियोजना का सबसे खास हिस्सा होगा एक लाख हिंदुओं को शस्त्र प्रशिक्षण देने की योजना। तीर्थ सेवा न्यास के अनुसार, इसका उद्देश्य किसी प्रकार की हिंसा नहीं, बल्कि आत्मरक्षा और सनातन परंपराओं की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अनुशासन, आत्मसंयम और आध्यात्मिक शौर्य का पाठ पढ़ाया जाएगा।
बाबा हठयोगी ने कहा कि “सनातन संसद केवल एक भवन नहीं, बल्कि भारतीय अध्यात्म और संस्कृति के पुनर्जागरण (revival of Indian spirituality) की दिशा में उठाया गया ऐतिहासिक कदम है।” यहां आयोजित होने वाले विचार सत्र, गुरुकुल सम्मेलन और साधु समाज संवाद भारत की प्राचीन विरासत को आधुनिक युग से जोड़ेंगे। परियोजना का उद्देश्य भारत की “Vedic Global Identity” को नए आयाम पर स्थापित करना है।

















