मशहूर भारतीय अमेरिकी निवेशक विनोद खोसला ने आईटी और बीपीओ उद्योग को लेकर बड़ी भविष्यवाणी की है। उनका कहना है कि मौजूदा स्वरूप में यह उद्योग 2030 से 2035 के बीच लगभग समाप्त हो सकता है। उन्होंने भारतीय आईटी कंपनियों को सलाह दी है कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर तेजी से काम करें, ताकि भविष्य में अपनी प्रासंगिकता बनाए रख सकें।
खोसला ने कहा कि केवल पुराने बिजनेस मॉडल पर टिके रहना संभव नहीं होगा। कंपनियों को नई तकनीक और नई सेवाओं की ओर बढ़ना होगा। उनका मानना है कि अगर भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर एआई सेवाएं उपलब्ध कराने में सफल होती हैं, तो उनके पास आगे बढ़ने का बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों से तकनीक लेना महंगा है, जबकि कई विकासशील देशों के पास पर्याप्त जानकारी नहीं है। ऐसे में भारत के पास एआई के क्षेत्र में नेतृत्व करने का मौका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो कंपनियां तेजी से बदलाव को स्वीकार करेंगी, वही भविष्य में टिक पाएंगी।
अगले 15 साल निर्णायक होंगे
नौकरियों पर एआई के असर को लेकर पूछे गए सवाल पर खोसला ने कहा कि आने वाले समय में उत्पादकता बढ़ेगी और कम लोगों की जरूरत पड़ेगी। अगले 15 साल दुनिया के लिए निर्णायक होंगे। उन्होंने कहा कि 2050 तक कई क्षेत्रों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं और कई सेवाएं सस्ती हो जाएंगी।
खोसला ने भारत के संदर्भ में भी एआई की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य में हर भारतीय के पास एक पर्सनल एआई डॉक्टर हो सकता है, जो हर समय उपलब्ध रहेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती और सुलभ हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देश के करोड़ों छात्र एआई ट्यूटर के माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं। वहीं छोटे किसानों को एआई के जरिए कृषि विशेषज्ञ जैसी सलाह मिल सकती है, जिससे उनकी उत्पादकता बढ़ेगी।
खोसला का मानना है कि एआई भारत के लिए चुनौती भी है और बड़ा अवसर भी। जो इस बदलाव को समय रहते समझेंगे और अपनाएंगे, वही भविष्य की अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा पाएंगे।
















