भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद में आज विशेष चर्चा आयोजित की जा रही है। इस बहस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे, जबकि राज्यसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह अपनी बात रखेंगे। इस महत्वपूर्ण चर्चा का मकसद वंदे मातरम के इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका और देश की सांस्कृतिक पहचान से इसके संबंध को फिर से सामने लाना है। लेकिन बहस शुरू होने से पहले ही इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष दूसरे दलों के महापुरुषों को अपना बताने का काम करता है। अखिलेश का कहना था कि सदन में कुछ लोग ऐसे बोल रहे थे जैसे वंदे मातरम केवल उनका ही गीत है। उन्होंने भाजपा पर ‘दरारवाद’ फैलाने का आरोप लगाया। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि वंदे मातरम बंगाल विभाजन के दौरान अंग्रेजों की सबसे बड़ी परेशानी बन गया था और इस गीत ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा दी थी।
फिछली सदी में गीत के साथ अन्याय हुआ – पीएम मोदी
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि पिछली सदी में इस गीत के साथ अन्याय हुआ और कांग्रेस मुस्लिम लीग के दबाव में झुक गई। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के इस फैसले ने देश के बंटवारे को भी प्रभावित किया। उनके इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने कहा कि भाजपा न तो बंगाल की भावना समझती है न देश की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग वंदे मातरम पर बैन लगाना चाहती थी और कांग्रेस ने इसे राष्ट्रगीत बनाकर देश की आवाज को मजबूत किया।
संसद में आज होने वाली इस बहस के लिए दस घंटे का समय निर्धारित किया गया है। कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी, गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा, प्रनीति शिंदे और अन्य नेता अपनी बात रखेंगे। चर्चा के दौरान 1937 में कांग्रेस द्वारा गीत की कुछ पंक्तियों को हटाने का मुद्दा भी गरम हो सकता है। भाजपा इसे तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़कर विपक्ष पर हमला करने की तैयारी में है।
पीएम मोदी पिछले कई सप्ताह से वंदे मातरम के मुद्दे पर कांग्रेस को लगातार कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के फैसले ने देश में विभाजन की जमीन तैयार की। आज सदन में होने वाली बहस में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस की संभावना है। वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का अवसर अब राजनीतिक टकराव में बदल गया है और देश इस बहस पर नजरें लगाए बैठा है।


















