Vande Bharat 4.0: भारत अब वंदे भारत एक्सप्रेस का नया और चौथा संस्करण लॉन्च करने जा रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को घोषणा की कि “वंदे भारत 4.0” अगले 18 महीनों में बनकर तैयार हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि यह नई ट्रेन न सिर्फ गति (speed) और आराम (comfort) में बेहतर होगी बल्कि वैश्विक स्तर (global standard) की मानी जाएगी। रेल मंत्री ने यह जानकारी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 16वीं अंतरराष्ट्रीय रेल उपकरण प्रदर्शनी (Rail Equipment Exhibition) के उद्घाटन के मौके पर दी।
तीन दिन चलने वाली यह प्रदर्शनी एशिया की सबसे बड़ी और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी रेल प्रदर्शनी है। इसमें दुनिया के 15 से अधिक देशों की 400 से ज्यादा कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, जापान, अमेरिका, रूस और ब्रिटेन जैसी तकनीकी महाशक्तियां शामिल हैं। प्रदर्शनी में रेल सेक्टर की नई मशीनरी, इंजन तकनीक और इनोवेशन को प्रदर्शित किया जा रहा है।
वंदे भारत 4.0 होगी विश्वस्तरीय ट्रेन
रेल मंत्री ने कहा कि वंदे भारत 4.0 को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि उसकी गुणवत्ता और आराम देखकर दुनिया के अन्य देश भी इसे अपनाने की इच्छा करेंगे। उन्होंने बताया कि नई ट्रेन में बेहतर टॉयलेट, अधिक आरामदायक सीटें और हाई-क्वालिटी कोच वर्कमैनशिप होगी।
यानी यह ट्रेन न सिर्फ तेज चलेगी बल्कि यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव (world-class travel experience) भी देगी। वर्तमान में चल रही वंदे भारत 3.0 ट्रेन 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सिर्फ 52 सेकंड में पकड़ लेती है।
रेल मंत्री ने कहा कि वंदे भारत 4.0 में इस क्षमता को और आगे बढ़ाया जाएगा। नई मोटर टेक्नोलॉजी और हल्के डिजाइन (lightweight design) के जरिए ट्रेन कम समय में ज्यादा रफ्तार हासिल कर सकेगी। इसमें कम शोर (noise) और कम कंपन (vibration) वाली तकनीक भी जोड़ी जाएगी।
350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनें आएंगी
रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेल 2047 तक 7000 किमी लंबे हाई-स्पीड कॉरिडोर (corridor) तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। इन कॉरिडोरों पर ट्रेनें 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से दौड़ेंगी। यह भारत को जापान और यूरोप जैसी हाई-स्पीड रेल तकनीक वाले देशों की बराबरी में ला खड़ा करेगा।
इस समय देश में 156 वंदे भारत, 30 अमृत भारत और 4 नामो भारत सेवाएं चलाई जा रही हैं। वंदे भारत 4.0 के आने से भारत के रेल नेटवर्क में स्पीड, सुरक्षा और सुविधा का नया अध्याय शुरू होगा। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत रेल परिवहन में आत्मनिर्भर बने और दुनिया को भारतीय तकनीक का उदाहरण दिखाए।

















