अमेरिकी टैरिफ का असर भारत की ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री पर चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी छमाही में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिख सकता है, जबकि नए निर्यात अनुबंधों को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। यह आकलन वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) ने बुधवार को जारी अपने ताजा आंकड़ों में किया है। उद्योग निकाय के मुताबिक, भारतीय ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री ने अप्रैल-सितंबर 2025 की पहली छमाही में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 3.56 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जो एक साल पहले की समान अवधि में 3.33 लाख करोड़ रुपये था।
पहली छमाही में उद्योग के निर्यात में 9.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 12.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि इसी अवधि में आयात लगभग 12.5 प्रतिशत बढ़कर 12.3 अरब डॉलर रहा। फिलहाल भारतीय ऑटो कलपुर्जा उत्पादों पर अमेरिका में 25 प्रतिशत टैरिफ लागू है। उद्योग को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में मौसमी मांग और बुनियादी ढांचे से जुड़ी गतिविधियों के चलते घरेलू मांग में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके अलावा जीएसटी ढांचे के तहत चुनिंदा वाहन श्रेणियों पर संभावित कर कटौती से ऑटो पार्ट्स सेक्टर को सहारा मिल सकता है।
अप्रैल से सितंबर की अवधि में अमेरिका को भारत का ऑटो पार्ट्स निर्यात लगभग स्थिर रहा। इस दौरान भारतीय कंपनियों ने अमेरिका को 3.64 अरब डॉलर के कलपुर्जों का निर्यात किया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 3.67 अरब डॉलर था। एक्मा के नामित अध्यक्ष श्रीराम विजी ने कहा कि आगे के महीनों में अमेरिका को होने वाला निर्यात थोड़ा अनिश्चित दिखाई दे रहा है और नए अनुबंधों को लेकर असमंजस की स्थिति है, हालांकि मौजूदा सप्लाई चेन कुछ समय तक जारी रहने की संभावना है।
उद्योग संगठन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात वृद्धि हासिल की गई। इन चुनौतियों में आपूर्ति शृंखला से जुड़ी बाधाएं, कच्चे माल की बढ़ती लागत और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग की कमजोरी शामिल रही। इसके बावजूद भारतीय ऑटो पार्ट्स उद्योग ने संतुलित प्रदर्शन किया है।
इसी बीच वैश्विक परिदृश्य पर बात करें तो विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू मांग और कर सुधारों के आधार पर चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया है। यह उसके जून में जारी अनुमान से 0.9 प्रतिशत अधिक है। हालांकि विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट ‘ग्लोबल इकोनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स’ में यह भी कहा है कि वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि दर घटकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है। यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि उस अवधि में अमेरिका का 50 प्रतिशत आयात शुल्क लागू रहेगा।
विश्व बैंक के अनुसार, अमेरिका को होने वाले कुछ निर्यातों पर ऊंचे शुल्क के बावजूद भारत की विकास दर के अनुमान में जून की तुलना में कोई नकारात्मक बदलाव नहीं किया गया है। बैंक का मानना है कि भारत आगे भी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि दर बनाए रख सकता है।
भारत की तेज आर्थिक वृद्धि को लेकर अन्य संस्थानों का नजरिया भी सकारात्मक बना हुआ है। पेशेवर सेवा एवं सलाहकार कंपनी Grant Thornton India ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है, जबकि 2026-27 में यह लगभग सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार, सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन के चलते 2025-26 में भारत की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रह सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.5 प्रतिशत से अधिक है। इन अनुमानों के आधार पर भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बने रहने की उम्मीद जताई जा रही है।



















