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Thursday, February 5, 2026
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उन्नाव कस्टडी डेथ केस में कुलदीप सिंह सेंगर को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की

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सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह फैसला हाईकोर्ट की ओर से सुनाया गया। इससे पहले भी इस मामले में सेंगर को कानूनी स्तर पर कई झटके लग चुके हैं।

इसी बीच उन्नाव दुष्कर्म मामले की पीड़िता ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की है। यह याचिका सेंगर की उस अपील के जवाब में दायर की गई है, जिसमें उन्होंने दुष्कर्म के मामले में मिली सजा को चुनौती दी है। पीड़िता का कहना है कि वह अपील के दौरान कुछ नई और अहम जानकारियां अदालत के सामने रखना चाहती है।

पीड़िता ने लगाया सेंगर पर गंभीर आरोप

पीड़िता ने अपनी याचिका में कहा है कि सेंगर ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। उसने यह भी आरोप लगाया कि मुकदमे के दौरान उसकी उम्र को लेकर फर्जी और गलत दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। यही दस्तावेज अब अपील में भी पेश किए जा रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

याचिका में पीड़िता ने यह भी बताया कि उसे और उसके परिवार को लगातार जान का खतरा बना हुआ है। उसने अदालत से अनुरोध किया है कि इन हालिया घटनाओं और तथ्यों को रिकॉर्ड में लिया जाए। इसके साथ ही उन्नाव स्थित उसके स्कूल के दो अधिकारियों से जन्मतिथि की पुष्टि के लिए अतिरिक्त साक्ष्य दर्ज कराने की मांग भी की गई है।

इस मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने प्रारंभिक सुनवाई की। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि सेंगर की अपील पहले से ही अंतिम सुनवाई के चरण में है। अदालत ने पीड़िता की याचिका पर सुनवाई के लिए 25 फरवरी की तारीख तय की है। साथ ही पीड़िता के वकील को 31 जनवरी तक सभी जरूरी दस्तावेज दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। सेंगर और केंद्रीय जांच ब्यूरो को भी अपना जवाब दाखिल करना होगा।

गौरतलब है कि 23 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अस्थायी रूप से निलंबित किया था। उस समय अदालत ने कहा था कि वह पहले ही सात साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है। हालांकि 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी। सेंगर ने दिसंबर 2019 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है, जो अभी लंबित है।

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