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Monday, March 23, 2026
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UGC Rule 2026: नए UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 2012 की व्यवस्था ही रहेगी लागू

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UGC Rule 2026: उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए यूजीसी नियम 2026 पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने इन नियमों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ किया कि फिलहाल वर्ष 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। नए नियमों को लेकर आरोप लगाए गए थे कि इससे सामान्य श्रेणी के छात्रों के साथ भेदभाव बढ़ सकता है।

इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची की पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि याचिकाकर्ताओं की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश को जातिविहीन समाज की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, न कि उलटी दिशा में।

सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख शब्दों में कहा कि जिन वर्गों को वास्तव में सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए संतुलित और उचित व्यवस्था होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि नए नियमों का दुरुपयोग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने चेताया कि भारत को उस स्थिति में नहीं जाना चाहिए, जहां शैक्षणिक संस्थानों में विभाजन की स्थिति पैदा हो जाए।

जाति के आधार पर छात्रों को अलग करना गलत

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने परिसरों में जाति के आधार पर छात्रों को अलग करने की सोच पर भी आपत्ति जताई। मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा कि अलग-अलग हॉस्टल या व्यवस्थाएं बनाना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब तक जातिविहीन समाज की दिशा में जो प्रगति हुई है, उससे पीछे नहीं जाना चाहिए। साथ ही रैगिंग को संस्थानों के माहौल के लिए सबसे गंभीर समस्या बताया।

अदालत ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस पूरे मामले में जवाब मांगा है। इस पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि नीति निर्धारकों को यह समझना होगा कि आरक्षित वर्गों के भीतर भी ऐसे लोग हैं जो अब सक्षम स्थिति में पहुंच चुके हैं। ऐसे में समानता और न्याय के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है।

यह मामला विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी University Grants Commission द्वारा 2026 में लागू की गई नियमावली से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये नियम समानता के नाम पर सामान्य वर्ग के छात्रों के अवसरों को सीमित कर सकते हैं और संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से अब देशभर की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी।

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