देश में 1 जनवरी 2026 से सभी नए दोपहिया वाहनों में एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) को अनिवार्य करने के सरकारी फैसले पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। नियम लागू होने में अब सिर्फ एक दिन बचा है, लेकिन वाहन निर्माताओं ने सरकार से इस पर पुनर्विचार की मांग कर दी है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र सरकार तय समयसीमा को आगे बढ़ा सकती है।
क्यों अटका ABS नियम
इस मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, दोपहिया वाहन कंपनियों का कहना है कि ABS से जुड़े पुर्जों की आपूर्ति फिलहाल देश में पर्याप्त नहीं है। यदि एक साथ सभी बाइकों और स्कूटरों में ABS अनिवार्य किया गया तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कंपनियों ने यह भी चेताया है कि इससे गाड़ियों की कीमतें बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर आम ग्राहकों पर पड़ेगा।
चरणबद्ध लागू करने का सुझाव
वाहन निर्माताओं ने सरकार को सुझाव दिया है कि ABS नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए। इससे उद्योग को तकनीकी और आपूर्ति से जुड़ी तैयारियों के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। फिलहाल यह नियम केवल 125 सीसी से अधिक क्षमता वाली बाइकों पर लागू है, जबकि कम क्षमता वाली बाइकों और स्कूटरों में कंबाइंड ब्रेकिंग सिस्टम (CBS) दिया जाता है।
सरकार की योजना और मौजूदा स्थिति
सरकार ने जून 2025 में सभी नए दोपहिया वाहनों में ABS अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, 1 जनवरी की समयसीमा नजदीक आने के बावजूद अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि Ministry of Road Transport and Highways सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है और अंतिम फैसला अभी लिया जाना बाकी है।
क्या है सरकार का मकसद
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का बड़ा हिस्सा दोपहिया वाहनों से जुड़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में हुई कुल सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 20% मामलों में दोपहिया वाहन शामिल थे। ABS को अनिवार्य करने का उद्देश्य ब्रेकिंग के दौरान वाहन का संतुलन बनाए रखना और दुर्घटनाओं की गंभीरता को कम करना है।




















