देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने एक महिला वकील की ओर से दायर आपराधिक शिकायत पर सुनवाई करते हुए आरोपी शख्स को अग्रिम जमानत दे दी है। इस दौरान अदालत ने न केवल शिकायत को बेवजह बताया बल्कि महिला वकील के पेशेवर आचरण पर भी कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर एक वकील होने के बावजूद उन्होंने अपने ही मुवक्किल के साथ अंतरंग संबंध क्यों बनाए।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस BV Nagarathna की अध्यक्षता वाली बेंच ने आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की। आरोपी फिलहाल लंदन में रह रहा है। बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि वह भारत लौटता है तो उसे इस मामले में गिरफ्तारी से संरक्षण मिलेगा।
महिला वकील के आचरण पर अदालत की नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकील को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि एक लॉयर से पेशेवर जिम्मेदारी और गरिमा की अपेक्षा की जाती है। अदालत ने सवाल किया कि जिस व्यक्ति के तलाक का केस वह लड़ रही थीं, उसी से उन्होंने अंतरंग संबंध कैसे बना लिए। खासतौर पर तब, जब उस व्यक्ति को अभी पत्नी से तलाक भी नहीं मिला था और मामला लंबित था।
बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से बने थे। न तो महिला वकील और न ही आरोपी शख्स एक-दूसरे से शादी के लिए तैयार थे। ऐसे में कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब रिश्ता सहमति से था तो बाद में आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की जरूरत क्यों पड़ी। अदालत ने इसे अनावश्यक आपराधिक मुकदमा बताया।
कोर्ट ने कहा, “आप एक शिक्षित वकील हैं। आपको यह पता होना चाहिए कि बिना तलाक कोई व्यक्ति दोबारा शादी भी नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में इस तरह के रिश्ते बनाना और फिर आपराधिक केस दर्ज कराना एक वकील से अपेक्षित आचरण के विपरीत है।”
आरोपी के वकील का दावा
आरोपी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि महिला वकील इससे पहले भी चार अलग-अलग लोगों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगा चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि Bombay High Court ने भी पूर्व में महिला वकील के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए जांच की बात कही थी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को कानूनी पेशे की नैतिकता से जोड़कर देखा जा रहा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि वकीलों से केवल कानून का ज्ञान ही नहीं बल्कि उच्च स्तर की पेशेवर मर्यादा और जिम्मेदारी की भी अपेक्षा की जाती है।




















