मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है और सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों को लेकर भारत को दुख है। साथ ही भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। विदेश मंत्री के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं खाड़ी क्षेत्र के कई देशों के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं।
भारतीय समुदाय की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय रहते और काम करते हैं। अनुमान के मुताबिक करीब एक करोड़ भारतीय इस इलाके में बसे हुए हैं। इसके अलावा ईरान में भी हजारों भारतीय पढ़ाई और रोजगार के सिलसिले में मौजूद हैं।
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र की स्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां से ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा आता है। तेल और गैस के प्रमुख सप्लायर इसी इलाके में हैं, इसलिए सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा भारत के लिए चिंता का कारण बन सकती है।
विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन
इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और कुछ अन्य दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देशहित के मुद्दों पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया।
संसद भवन के पास हुए इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने एक बैनर भी उठाया जिस पर लिखा था— “इंडिया नीड्स लीडरशिप, नॉट साइलेंस।”
लोकसभा में भी उठा मध्य पूर्व संकट का मुद्दा
विदेश मंत्री ने राज्यसभा के बाद लोकसभा में भी सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार प्रभावित देशों के संपर्क में है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
जयशंकर ने यह भी बताया कि सरकार ने भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके। हालांकि उनके भाषण के दौरान विपक्षी दलों के सदस्य लगातार हंगामा करते रहे और इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग उठाते रहे।
ईरान में भारतीयों की मदद के लिए कदम
विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा के लिए दूतावास लगातार काम कर रहा है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कई भारतीय छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद की है।
इसके अलावा व्यापार के सिलसिले में ईरान पहुंचे भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटने में सहायता दी गई है। उन्होंने बताया कि तेहरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय है और हाई अलर्ट पर काम कर रहा है।
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और संघर्ष का दायरा बढ़ता जा रहा है। इस स्थिति का असर आम जीवन और कामकाज पर भी पड़ रहा है, इसलिए भारत सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष को लेकर भारत ने शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता उसकी प्राथमिकता बनी हुई है।



















