Rewa News: ‘रीवा के आईजी साहब, अब स्पष्ट बताइए — आप किसकी सुरक्षा कर रहे हैं? अपनी कुर्सी की, अपने अफसरों की या उस सिस्टम की जो जनता के बच्चों को नशे की हवेली तक पहुंचा देता है? थानेदारों की मिलीभगत की “लिस्ट” लेकर खड़े रहना और सिर्फ चेतावनी दे देना — यह शासन नहीं, ड्रामा है।
आप सुपरवाइजरी ऑफिसर हैं। इधर कार्रवाई की जिम्मेदारी आपकी है, बयानबाजी की नहीं। क्या आप सच में किसी को बचा रहे हैं — किसी सिपाही को, विभाग को — या फिर अपनी खुद की छूट की पारदर्शिता बनाकर खुद को बचा रहे हैं? कार्रवाई की जगह हवाई चेतावनी से इन मौतों का हिसाब नहीं माँगा जाएगा।
ऑपरेशन प्रहार-2’ के तहत आईजी गौरव राजपूत ने सोमवार को पुलिसकर्मियों को चेतावनी दी कि नशीले सिरप की बिक्री थानेदारों की जानकारी के बिना संभव नहीं है और उनके पास सबूत हैं। सवाल यह है — जब सबूत हैं, तो गिरफ्तारी क्यों नहीं? क्या नशे का कारोबार पुलिस की मिलीभगत से नहीं चल रहा? जनता अब यह समझ चुकी है कि “लिस्ट बनाना” और “एक्शन लेना” में वही फर्क है जो जिम्मेदारी और नौटंकी में होता है।
रीवा, मऊगंज, सोहागी और शहडोल में लाखों की नशीली सिरप जब्त हो चुकी, करोड़ों की कीमत बताई जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि हर थाने में ‘हिस्सेदारी’ तय है। आईजी का भाषण सुर्खियों में है, पर जनता के घर अब भी मातम में हैं। पंजाब के डीजीपी के बेटे का उदाहरण देने से नहीं, गिरफ्तारी देने से फर्क पड़ेगा।
अगर 15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता यही मानेगी — कि आईजी की “लिस्ट” सिर्फ फाइलों में नहीं, उनकी “सुविधा” में रखी गई है।अब वक्त आ गया है, आईजी साहब — जनता डरती नहीं, सवाल पूछती है। अगर पुलिस ही नशे की रखवाली करेगी, तो अपराधी कौन रहेगा?





















