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Wednesday, March 25, 2026
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छोटी रकम के ऑनलाइन फ्रॉड पर RBI का बड़ा ऐलान, नए नियम जल्द

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डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को घोषणा की कि छोटी रकम वाले धोखाधड़ी के ट्रांजैक्शन में हुए नुकसान के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये तक मुआवजा देने की एक नई रूपरेखा लाई जाएगी।

चालू वित्त वर्ष की आखिरी मौद्रिक नीति बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए गवर्नर ने कहा कि डिजिटल पेमेंट की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आरबीआई एक डिस्कशन पेपर भी जारी करेगा। इसमें ‘देरी से क्रेडिट’ जैसे उपाय और वरिष्ठ नागरिकों जैसे खास वर्गों के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण की व्यवस्था शामिल हो सकती है।

देरी से क्रेडिट का मतलब ऐसी सुरक्षा व्यवस्था से है, जिसमें कुछ डिजिटल ट्रांजैक्शन से प्राप्त रकम को रिसीवर के बैंक खाते में जानबूझकर कुछ समय बाद जमा किया जाएगा। इसका उद्देश्य फ्रॉड की स्थिति में समय रहते ट्रांजैक्शन को रोकना या उसकी पहचान करना है।

ग्राहकों के हितों का रखा जाएगा ध्यान

संजय मल्होत्रा ने बताया कि ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए आरबीआई तीन अहम दिशानिर्देशों का मसौदा भी जारी करेगा। पहला मसौदा वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री से जुड़ा होगा। दूसरा अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन में ग्राहकों की देनदारी को सीमित करने से संबंधित होगा। तीसरा लोन रिकवरी और रिकवरी एजेंटों की भूमिका को लेकर होगा।

गवर्नर ने कहा कि अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन में ग्राहकों की शून्य या सीमित देनदारी से जुड़े मौजूदा निर्देश वर्ष 2017 में जारी किए गए थे। टेक्नोलॉजी के तेजी से बदलते माहौल को देखते हुए इन नियमों की समीक्षा की गई है और अब इन्हें अपडेट करने की जरूरत महसूस की गई है।

आरबीआई ने संकेत दिया है कि संशोधित निर्देशों का मसौदा जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा। इसमें छोटी राशि के धोखाधड़ी वाले लेनदेन में क्षतिपूर्ति की स्पष्ट व्यवस्था भी शामिल होगी, ताकि ग्राहकों को समय पर न्याय मिल सके।

संजय मल्होत्रा ने यह भी कहा कि वित्तीय उत्पादों और सेवाओं की गलत बिक्री से न केवल ग्राहकों को नुकसान होता है बल्कि वित्तीय संस्थानों की साख पर भी असर पड़ता है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि बैंक काउंटर पर बेचे जा रहे थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स ग्राहकों की जरूरतों और उनकी जोखिम लेने की क्षमता के अनुरूप हों।

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