प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने और श्रद्धालुओं के साथ कथित बदसलूकी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मौके पर मौजूद जयपुर के एक संत ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जयपुर के संत स्वामी देवकीनंदन पुरोहित परम ने दावा किया है कि मौनी अमावस्या के दिन आईपीएस अफसरों ने सुनियोजित तरीके से बदसलूकी और मारपीट की। उन्होंने कहा कि यह सब अचानक नहीं हुआ, बल्कि पहले से तय योजना के तहत किया गया।
संत देवकीनंदन के अनुसार, घटना के दौरान करीब 30 भक्तों को हिरासत में लिया गया। उन्हें लगभग तीन घंटे तक थाने में रखा गया। वहां भी उनके साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि भक्त डरे हुए थे और किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है।
बड़े पुलिस अधिकारियों के इशारे पर हुआ सबकुछ
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ बड़े पुलिस अधिकारियों ने भक्तों को पैरों के जूतों से ठोकर मारी। इस रवैए से मौके पर मौजूद इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबल तक हैरान रह गए थे। संत के मुताबिक, निचले स्तर के पुलिसकर्मियों ने सिर्फ पालकी को रोकने और आगे बढ़ने से मना किया था। उन्होंने किसी भी श्रद्धालु के साथ मारपीट नहीं की।
स्वामी देवकीनंदन पुरोहित परम धर्म संसद में प्रतिनिधि हैं। उनका एक आश्रम भी है और वह गौशालाओं से जुड़े कार्य करते हैं। वे ज्योतिष पीठ से जुड़े हुए हैं और ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अपना गुरु मानते हैं।
माघ मेले के दौरान वे स्वयं प्रयागराज पहुंचे थे। मौनी अमावस्या के दिन वे शंकराचार्य के शिविर में ही ठहरे हुए थे और उसी दिन उनके साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि उस दिन पुलिस और प्रशासन का व्यवहार पूरी तरह समझ से बाहर था। उन्होंने आरोप लगाया कि बुजुर्ग संतों तक को नहीं बख्शा गया।
खुद आईएएस और आईपीएस ने उकसाया
संत देवकीनंदन ने कहा कि घटना के समय आईएएस और आईपीएस अफसर खुद मोर्चा संभाले हुए थे। वे लगातार नीचे के पुलिसकर्मियों को उकसा रहे थे। उनके अनुसार, जिस तरह की बर्बरता उस दिन देखने को मिली, वह बेहद परेशान करने वाली थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद कुछ अधिकारी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे थे। झड़प के दौरान एक अधिकारी बार-बार एक जाति विशेष का नाम लेकर टिप्पणी कर रहा था। संत के मुताबिक, इस तरह की भाषा और व्यवहार ने हालात को और बिगाड़ दिया।
फिलहाल माघ मेले में हुए इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बयानबाजी तेज होती जा रही है। प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

















