निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़ी एक अहम खबर सामने आ रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पीएफ पर मिलने वाली ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया में है। संकेत मिल रहे हैं कि इस बार कर्मचारियों को थोड़ा कम ब्याज मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक EPFO मार्च के पहले सप्ताह में होने वाली अपनी 239वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज की बैठक में नई ब्याज दर पर फैसला ले सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि पीएफ ब्याज दर को घटाकर 8 से 8.20 प्रतिशत के दायरे में रखा जा सकता है। मौजूदा वित्त वर्ष 2024-25 के लिए यह दर 8.25 प्रतिशत है।
ब्याज दर में कटौती के पीछे एक वजह EPFO के दायरे में तेजी से बढ़ते सदस्य बताए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना के तहत बड़ी संख्या में नए कर्मचारी EPFO से जुड़ रहे हैं। ऐसे में भविष्य की देनदारियों को संभालने और फंड में न्यूनतम बफर बनाए रखने के लिए ब्याज दरों में हल्की कटौती पर विचार किया जा रहा है।
CBT से मंजूरी मिलने के बाद पीएफ की ब्याज दर को वित्त मंत्रालय की स्वीकृति मिलती है। इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय इसे अधिसूचित करता है। अधिसूचना जारी होने के बाद ही पीएफ खातों में ब्याज की रकम ट्रांसफर की जाती है।
इस बीच EPFO की फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट और ऑडिट कमेटी फरवरी के अंतिम सप्ताह में बैठक कर निवेश से मिलने वाले रिटर्न की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही EPFO को वेतन सीमा पर फैसला लेने के निर्देश दे चुका है।

















