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Thursday, January 15, 2026
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नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल 2025 की घोषणा, राजगीर में होगा ज्ञान और संस्कृति का संगम

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पद्मश्री अरुप कुमार दत्ता और पूर्व डीजीपी व प्रसिद्ध लेखक श्री कला सैकिया ने गुवाहाटी के ज्योति चित्राबन, काहिलीपारा में आयोजित एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल (NLF) 2025 की आधिकारिक घोषणा की। यह फेस्टिवल ‘लेगसी, लैंग्वेज एंड लिटरेचर’ की थीम पर आधारित होगा और 21 से 25 दिसंबर 2025 तक राजगीर, नालंदा (बिहार) में आयोजित किया जाएगा।

नालंदा यूनिवर्सिटी बनी साझेदार संस्था

इस अवसर पर बताया गया कि नालंदा यूनिवर्सिटी इस फेस्टिवल की मुख्य साझेदार संस्था होगी। यह साझेदारी प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक सृजनशीलता के संगम का प्रतीक है। इस आयोजन में साहित्य, कला और संस्कृति जगत से जुड़े कई दिग्गजों ने भाग लिया।

इस मौके पर मुख्य अतिथि श्री कला सैकिया, पूर्व डीजीपी, असम सरकार और गेस्ट ऑफ ऑनर श्री कल्याण चक्रवर्ती (ACS), सांस्कृतिक मामलों के विभाग, असम सरकार उपस्थित रहे। फेस्टिवल की चेयरपर्सन डी. आलिया, ट्रस्टी धानु बिहार, और फेस्टिवल डायरेक्टर गंगा कुमार सहित कई वरिष्ठ प्रतिनिधि मंच पर मौजूद थे।

नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल

इस मौके पर पद्मश्री अरुप कुमार दत्ता, प्रो. अरुपज्योति सैकिया, श्री प्रभु झा, प्रो. मधुमिता बारबोराह, और श्री काइनफम सिंग नोंगकिनरिह जैसे प्रतिष्ठित लेखकों ने भारत की साहित्यिक विविधता पर अपने विचार रखे।

मुख्य अतिथि श्री कला सैकिया ने कहा, “नालंदा सिर्फ एक स्थान नहीं है। यह एक जीवित विचार है। ज्ञान का शाश्वत प्रकाश है जो भारत और दुनिया को प्रेरित करता रहता है। इस फेस्टिवल को गुवाहाटी लाना इस विश्वास को दर्शाता है कि भारत का हर हिस्सा, बिहार के हृदय से लेकर ब्रह्मपुत्र के तट तक रचनात्मकता, संवाद और विरासत की समान धड़कन साझा करता है।”

असम हमेशा कहानीकारों और विचारकों की भूमि

श्री कल्याण चक्रवर्ती ने कहा, “असम हमेशा से कहानीकारों और विचारकों की भूमि रहा है। नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल का यहां आना हमारी साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। भारत की विविध भाषाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को संरक्षित और प्रोत्साहित करने की, जो हमारे राष्ट्र की आत्मा बनाती हैं।”

डी. आलिया, चेयरपर्सन ने कहा, “नालंदा उस ज्ञान का प्रतीक है जो केवल मस्तिष्क को नहीं, बल्कि समाज को भी मुक्त करता है। इस फेस्टिवल के ज़रिए हम संवाद, गरिमा और विविधता के सार को भारत के हर कोने तक ले जाना चाहते हैं। गुवाहाटी की गर्मजोशी और बौद्धिकता नालंदा की उस भावना को दर्शाती है—सवाल पूछने का साहस और सुनने की गरिमा।”

नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल

पद्मश्री अरुप कुमार दत्ता ने कहा कि एनएलएफ की मुंबई से गुवाहाटी तक की यात्रा फेस्टिवल की भारतभर में बढ़ती गूंज को दर्शाती है। नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल 2025 ज्ञान, कला और विमर्श का उत्सव होगा जो हमारे प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विचारों से जोड़ता है।”

इस आयोजन में नालंदा लिटरेचर डेवलपमेंट प्रोग्राम के बारे में भी बात की गई जो सितंबर 2025 से मार्च 2026 तक चलेगा। इसका उद्देश्य मुख्य फेस्टिवल से पहले रचनात्मक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा एनएलएफ की पूरी टीम ने भारत के महान गायक और संगीतकार श्री जुबिन गर्ग को भारतीय संगीत जगत में उनके असाधारण योगदान, विशेष रूप से असमिया संस्कृति और सभ्यता के लिए, श्रद्धांजलि अर्पित की।

नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल 2025 भारत की बौद्धिक और सांस्कृतिक विरासत के एक भव्य संगम का वादा करता है जो देशभर और प्रवासी भारतीय समुदाय की आवाज़ों को राजगीर, नालंदा के ऐतिहासिक स्थलों पर एक साथ लाएगा और भारत की कालातीत ज्ञान और कल्पना की भावना को फिर से मजबूत बनाएगा।

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