MP Farmer Protest: मध्य प्रदेश के धार जिले में सोमवार को NH-52 पर बड़ा किसान आंदोलन देखने को मिला, जहां चार जिलों के हजारों किसान सड़क पर बैठ गए और चक्काजाम कर दिया। प्रशासन ने देखते ही देखते 400 पुलिस जवानों और अधिकारियों को मौके पर तैनात किया, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। किसान ट्रैक्टरों और वाहनों के साथ हाईवे पर डटे हुए हैं और कह रहे हैं कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों का कहना है कि वे बीते पांच महीनों से अपनी समस्याओं को लेकर आवेदन देते आ रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन ने उनकी बातों पर कोई कार्रवाई नहीं की। किसानों के मुताबिक, वे बार-बार अधिकारियों से मिलते रहे, लेकिन समाधान न निकलने से अब वे मजबूर होकर सड़कों पर उतर आए हैं।
किसान अपनी इन मांगों पर अड़े
किसानों की चार प्रमुख मांगें हैं, जिनके इर्द-गिर्द पूरा आंदोलन घूम रहा है। पहली मांग—मक्का, सोयाबीन और मुख्य फसल कपास की सरकारी खरीद पहले की योजना के अनुसार की जाए, ताकि किसानों को नुकसान न उठाना पड़े। दूसरी मांग—सभी किसानों को ऋणमुक्त किया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी लागू की जाए।
तीसरी मांग—आदि गुरु शंकराचार्य के संकल्प के अनुरूप गौ माता को “राष्ट्रमाता” का दर्जा दिया जाए। चौथी महत्वपूर्ण मांग—केंद्र सरकार अपनी आयात-निर्यात नीति को किसानों के हित में बदले और दलहन, कपास और प्याज जैसे उत्पादों पर लगी निर्यात रोक हटाई जाए।
धरने के दौरान किसानों ने सड़क के बीच में पेड़ रख दिए, जिसके कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। नारेबाजी तेज होते ही किसान “जय जवान, जय किसान” के नारे लगाने लगे। कई किसान दूर-दूर के गांवों से ट्रैक्टरों पर भरकर पहुंचे।
इस बीच प्रशासनिक अधिकारी किसानों से बातचीत कर शांति बनाए रखने की अपील करते नजर आए। पुलिस बल ने भी हालात को शांतिपूर्ण तरीके से संभालने की कोशिश की, ताकि किसी प्रकार की झड़प या हिंसा न हो। हालांकि, किसान अपनी मांगों पर अडिग हैं और उन्होंने स्पष्ट किया है कि समाधान के बिना आंदोलन खत्म नहीं होगा।





















