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Thursday, January 15, 2026
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देश से विदा हुआ मॉनसून, फिर भी MP में झमाझम बारिश की संभावना, 12 जिलों में अलर्ट जारी

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मॉनसून सीजन अब आधिकारिक रूप से खत्म हो गया है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 15 अक्टूबर की सामान्य तिथि से एक दिन बाद यानी 16 अक्टूबर को पूरे देश से वापस लौट गया। हालांकि इसके बावजूद मध्य प्रदेश के कई जिलों में अगले एक-दो दिन तक बारिश की संभावना बनी हुई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार को प्रदेश के नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और पांढुर्णा जिलों में मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई है।

विभाग ने इन इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि इन जिलों में आंधी और बिजली गिरने जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। इससे पहले गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटों के मौसम की रिपोर्ट में जबलपुर संभाग के कुछ हिस्सों में बारिश दर्ज की गई, जबकि अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहा।

बुधवार को प्रदेश का अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस नर्मदापुरम में और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस खंडवा में दर्ज किया गया। वहीं, बीते दिन की वर्षा में उमरेठ में सबसे अधिक 33.4 मिमी, परासिया में 25.3 मिमी, छिंदवाड़ा में 1.8 मिमी और जुनारदेव में 1.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के लिए बड़वानी, खरगोन, बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों में मध्यम से तेज बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। इसके अलावा विदिशा, उज्जैन, धार, इंदौर, देवास, सीहोर, खंडवा और सिवनी जिलों में मध्यम बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जहां 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। विभाग ने यह चेतावनी गुरुवार रात तक के लिए दी है।

इस बीच, सिनोटिक परिस्थितियों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 16 अक्टूबर 2025 को पूरे देश से वापस हो गया है। वहीं, उत्तर-पूर्व मॉनसून की वर्षा गतिविधि तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और केरल-माहे क्षेत्र में शुरू हो गई है। मौसम विभाग ने बताया कि दक्षिण-पूर्व अरब सागर और लक्षद्वीप क्षेत्र की ऊपरी हवा में चक्रवातीय परिसंचरण सक्रिय है, जो समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है और इसके प्रभाव से 19 अक्टूबर के आसपास निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है।

आमतौर पर मॉनसून एक जून को केरल में प्रवेश करता है और आठ जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेता है। यह सितंबर के मध्य से उत्तर-पश्चिम भारत से लौटना शुरू करता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इस बार हालांकि मॉनसून एक दिन की देरी से विदा हुआ है, लेकिन इसके बाद भी कुछ जगहों पर बारिश की मेहरबानी बनी हुई है।

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